रेलवे मेक इन इंडिया
रेलवे मेक इन इंडिया
रेलवे में “मेक इन इंडिया” राष्ट्रीय वाहक की वह पहल है जिसका लक्ष्य प्रत्येक रोलिंग स्टॉक, सिग्नलिंग प्रणाली, ट्रैक घटक और यहां तक कि स्टेशन अवसंरचना का स्वदेशी डिजाइन, निर्माण और रखरखाव करना है ताकि भारत एक वैश्विक रेल-उपकरण केंद्र बन सके और ₹1.5-लाख-करोड़ का वार्षिक आयात बिल लगभग शून्य हो जाए।
प्रमुख तथ्य एवं आंकड़े
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| रेल मेक इन इंडिया की शुरुआत की तिथि | 24 सितंबर 2014 (मेक इन इंडिया सप्ताह के साथ) |
| पहला मेड-इन-इंडिया लोकोमोटिव | डीएलडब्ल्यू, वाराणसी से डब्ल्यूएजी-12 (12,000 एचपी) (अप्रैल 2018) |
| पहला स्वदेशी ईएमयू | बीईएमएल और आरडीएसओ द्वारा मेधा (3-फेज आईजीबीटी) (2019) |
| पहला स्वदेशी वंदे भारत | ट्रेन-18, इंटीग्रल कोच फैक्टरी, फरवरी 2019 |
| अब बनने वाला उच्चतम एचपी मालगाड़ी लोको | 12,000 एचपी डब्ल्यूएजी-12 (ट्विन-कैब) |
| ‘मेड इन इंडिया’ कोच का कुल प्रतिशत | 2017-18 से 100% (सभी आईसीएफ/एलएचबी डिजाइन) |
| एलएचबी कोच में भारतीय विक्रेताओं की हिस्सेदारी | मूल्य के हिसाब से > 90% |
| मेट्रो कोच स्वदेशीकरण | अल्स्टॉम-इंडिया मुंबई और चेन्नई रेक में 75% |
| रेल-कम-सड़क वाहन और टावर-कार | आरडीएसओ और बीईएमएल द्वारा 100% स्वदेशी |
| स्वचालित सिग्नलिंग ‘कवच’ | 95% भारतीय आईपी, आरडीएसओ द्वारा विकसित |
| इलेक्ट्रिक लोको उत्पादन लक्ष्य | 2025 तक 1,200 लोको/वर्ष (सीएलडब्ल्यू+डीएलडब्ल्यू+बीएलडब्ल्यू) |
| डीएफसी लोको का ऑर्डर दिया गया | अल्स्टॉम (मधेपुरा) और बीएचईएल-तितागढ़ संयुक्त उद्यम पर |
| स्टेशन पुनर्विकास–भारतीय भागीदार | आईआरएसडीसी, आरएलडीए, एनबीसीसी, आरवीएनएल, राइट्स |
| रेल में कुल एफडीआई की अनुमति | 2014 से अधिकांश क्षेत्रों में 100% |
| आयात पर वर्तमान वार्षिक बचत | ≈ ₹12,000 करोड़ (वित्तीय वर्ष 24) |
महत्वपूर्ण बिंदु
- पारंपरिक यात्री कोच का 100% अब भारत के भीतर ही निर्मित होता है (आईसीएफ, आरसीएफ, एमसीएफ)।
- डीएलडब्ल्यू (अब बनारस लोको वर्क्स) ने अल्स्टॉम से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के तहत भारत का पहला 12,000 एचपी इलेक्ट्रिक मालगाड़ी लोकोमोटिव रोल आउट किया—900 से अधिक का ऑर्डर दिया गया है।
- ‘ट्रेन-18’ (वंदे भारत) एक पूर्णतः घरेलू आईपी है: डिजाइन आरडीएसओ द्वारा, शेल्स आईसीएफ द्वारा, प्रोपल्शन मेधा द्वारा, सॉफ्टवेयर बीएचईएल द्वारा।
- ‘कवच’ स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली एसआईएल-4 प्रमाणित है और 2025 तक 3,000 किमी गोल्डन-क्वाड पर अनिवार्य है।
- भारतीय रेलवे ने पहियों का आयात बंद कर दिया है; रेल व्हील प्लांट, बेला और आरडब्ल्यूएफ, येलहंका 100% मांग पूरी करते हैं।
- ईएमयू/एमईएमयू ट्रैक्शन उपकरण स्वदेशीकरण 92% तक पहुंच गया है; केवल सेमीकंडक्टर्स अभी भी आयातित हैं।
- मेट्रो रेक निर्माण सुविधाएं श्रीसिटी (आंध्र), सावली (गुजरात), कोयंबटूर और बेंगलुरु में मौजूद हैं।
- राष्ट्रीय रेल योजना (2030) 100% इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन और 100% ‘मेड इन इंडिया’ रोलिंग स्टॉक की परिकल्पना करती है।
- उच्च-गति गलियारा ईपीसी अनुबंधों का 75% भारतीय फर्मों के लिए आरक्षित है (मुंबई-अहमदाबाद)।
- ‘वन-स्टेशन-वन-प्रोडक्ट’ योजना 1,000 ए-1 स्टेशनों पर स्थानीय एमएसएमई शिल्प को बढ़ावा देकर मेक-इन-इंडिया से जुड़ती है।
- उन्नत कोच घटकों (एयर-कंडीशनिंग, कपलर्स, कंपोजिट) के लिए उत्पादन-लिंक्ड-प्रोत्साहन (पीएलआई) 2022 में अधिसूचित किया गया।
- आरडीएसओ ने 180 मास्टर विशिष्टताएं जारी की हैं जो महत्वपूर्ण सुरक्षा वस्तुओं के लिए केवल भारत में पंजीकृत आपूर्तिकर्ताओं को ही अनुमति देती हैं।
- रेल वस्तुओं से निर्यात आय वित्तीय वर्ष 24 में ₹3,000 करोड़ पार कर गई (मोजाम्बिक, श्रीलंका, नेपाल को लोको; बांग्लादेश को कोच)।
- रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस (राइट्स) और आईआरकॉन अब 62 देशों को ‘मेड इन इंडिया’ रेल प्रणालियों के टर्नकी निर्यातक हैं।
परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- भारत की पहली 100% स्वदेशी अर्ध-उच्च गति ट्रेन का नाम बताइए।
- कौन सा प्लांट भारतीय रेलवे के पहियों का 100% निर्माण करता है?
- डब्ल्यूएजी-12 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की हॉर्सपावर क्या है?
- ‘कवच’ एटीपी प्रणाली किस संगठन ने विकसित की है?
- राष्ट्रीय रेल योजना (2020) किस मंत्रालय के तहत लॉन्च की गई थी?
अभ्यास बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न:01 पहला मेड-इन-इंडिया 12,000 एचपी इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव कहाँ रोल आउट किया गया था?
A) चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स, आसनसोल
B) बनारस लोको वर्क्स (डीएलडब्ल्यू), वाराणसी
C) इंटीग्रल कोच फैक्टरी, चेन्नई
D) रेल कोच फैक्टरी, कपूरथला
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सही उत्तर: B
स्पष्टीकरण: वाराणसी में बनारस लोको वर्क्स (डीएलडब्ल्यू) ने भारत का पहला 12,000 एचपी इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव निर्मित और रोल आउट किया, जो उच्च-शक्ति स्वदेशी ट्रैक्शन क्षमता में एक प्रमुख मील का पत्थर है।
प्रश्न:02 निम्नलिखित में से कौन सा मेक-इन-इंडिया कोच के तहत स्वदेशीकृत उप-घटक नहीं है?
A) कपलर ड्राफ्ट गियर
B) एयर-कंडीशनिंग पैकेज
C) रेल-व्हील स्टील मिश्र धातु
D) आईजीबीटी ट्रैक्शन कन्वर्टर
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सही उत्तर: C
स्पष्टीकरण: रेल-व्हील स्टील मिश्र धातु पहले ही स्वदेशीकृत हो चुकी है; अन्य वस्तुएं अभी भी मेक-इन-इंडिया कोच कार्यक्रम के तहत स्थानीयकृत की जा रही हैं।
प्रश्न:03 ट्रेन-18 (वंदे भारत) को डिजाइन और विकसित किया गया था
A) डीएमआरसी द्वारा बीएचईएल के सहयोग से
B) आरडीएसओ द्वारा आईसीएफ के सहयोग से
C) सीएलडब्ल्यू द्वारा एनटीपीसी के समर्थन से
D) रेलटेल द्वारा संयुक्त रूप से एसआईडीबीआई के साथ
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सही उत्तर: B
स्पष्टीकरण: वंदे भारत (ट्रेन-18) को स्वदेशी रूप से रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) द्वारा इंटीग्रल कोच फैक्टरी (आईसीएफ), चेन्नई के सहयोग से डिजाइन और विकसित किया गया था।
प्रश्न:04 भारतीय रेलवे में अब 100% एफडीआई की अनुमति है
A) केवल यात्री ट्रेन संचालन के लिए
B) केवल मालगाड़ी ट्रेन संचालन के लिए
C) यात्री और मालगाड़ी दोनों के बुनियादी ढांचे के लिए
D) उपरोक्त में से कोई नहीं
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सही उत्तर: C
स्पष्टीकरण: भारत सरकार ने भारतीय रेलवे में यात्री और मालगाड़ी दोनों बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए स्वचालित मार्ग के तहत 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दी है, जिसमें उच्च-गति ट्रेनें, उपनगरीय गलियारे, मालगाड़ी टर्मिनल, रोलिंग स्टॉक और सिग्नलिंग प्रणालियाँ जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
प्रश्न:05 स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ किस सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल (एसआईएल) के लिए प्रमाणित है?
A) एसआईएल-1
B) एसआईएल-2
C) एसआईएल-3
D) एसआईएल-4
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सही उत्तर: D
स्पष्टीकरण: कवच, भारत की स्वदेशी एटीपी प्रणाली, एसआईएल-4 के लिए प्रमाणित है—सर्वोच्च सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल—जो खतरनाक विफलता की अत्यंत कम संभावना को दर्शाता है और ट्रेन संचालन के लिए अधिकतम सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
प्रश्न:06 कौन सी सुविधा भारत में पारंपरिक आईसीएफ कोच की अधिकतम संख्या का उत्पादन करती है?
A) रेल कोच फैक्टरी, कपूरथला
B) इंटीग्रल कोच फैक्टरी, चेन्नई
C) मॉडर्न कोच फैक्टरी, रायबरेली
D) रेल व्हील प्लांट, बेला
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सही उत्तर: B
स्पष्टीकरण: चेन्नई में स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी (आईसीएफ), जिसकी स्थापना 1955 में हुई थी, भारत में कोच निर्माण की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी इकाई है, जो भारतीय रेलवे के लिए पारंपरिक आईसीएफ-डिजाइन कोच का बड़ा हिस्सा तैयार करती है।
प्रश्न:07 वह रेल व्हील प्लांट जो भारतीय रेलवे की कुल आवश्यकता को पूरा करता है, स्थित है
A) दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल
B) बेला, छपरा (बिहार)
C) कपूरथला, पंजाब
D) राय बरेली, उत्तर प्रदेश
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सही उत्तर: B
स्पष्टीकरण: भारतीय रेलवे की पहियों, एक्सल और व्हील-सेट की पूरी आवश्यकता बिहार में छपरा के पास बेला स्थित रेल व्हील प्लांट द्वारा पूरी की जाती है।
प्रश्न:08 एनआरपी 2030 के अनुसार, रोलिंग स्टॉक का कितना प्रतिशत ‘मेड इन इंडिया’ होने का लक्ष्य है?
A) 75%
B) 90%
C) 100%
D) 60%
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सही उत्तर: C
स्पष्टीकरण: राष्ट्रीय रेल योजना 2030 का लक्ष्य रोलिंग स्टॉक निर्माण में पूर्ण आत्मनिर्भरता है, जिसमें लक्ष्य 100% ‘मेड इन इंडिया’ निर्धारित किया गया है।
प्रश्न:09 कौन सी सार्वजनिक उपक्रम ‘मेड इन इंडिया’ लोकोमोटिव और रेल प्रणालियों के लिए नोडल निर्यातक है?
A) आईआरसीटीसी लिमिटेड
B) राइट्स लिमिटेड
C) बीएचईएल
D) कॉन्कॉर
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सही उत्तर: B
स्पष्टीकरण: राइट्स लिमिटेड को भारत में निर्मित लोकोमोटिव और रेल प्रणालियों के निर्यात के लिए नामित नोडल सार्वजनिक उपक्रम है, जो ‘मेड इन इंडिया’ रेल उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बाजार में उतारने के लिए अपनी इंजीनियरिंग और परामर्श विशेषज्ञता का लाभ उठाती है।
प्रश्न:10 किस वस्तु के स्वदेशीकरण ने भारतीय रेलवे को अधिकतम वार्षिक विदेशी मुद्रा की बचत करने में मदद की है?
A) रेलवे पहिए
B) इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव
C) उच्च-गति रेल
D) सिग्नलिंग प्रणालियाँ
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सही उत्तर: A
स्पष्टीकरण: रेलवे पहियों के स्वदेशी उत्पादन ने बड़े आयात की आवश्यकता को समाप्त कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेलवे के लिए सर्वाधिक वार्षिक विदेशी-मुद्रा बचत हुई है।