एक्सल काउंटर
1. एक्सल काउंटर क्या है?
- परिभाषा: एक ट्रैक-साइड इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जो एक्सलों की संख्या गिनता है जो एक सिग्नलिंग सेक्शन (ब्लॉक सेक्शन, साइडिंग, प्लेटफॉर्म लाइन आदि) में प्रवेश करते हैं और उससे बाहर निकलते हैं।
- उद्देश्य: यह सिद्ध करना कि सेक्शन खाली है (कोई ट्रेन या वाहन पीछे नहीं छूटा है) और इस प्रकार अगली ट्रेन के लिए सिग्नल को क्लियर करने की अनुमति देना।
- दर्शन:
“Count-in = Count-out ➔ Section Clear”
“Count-in ≠ Count-out ➔ Section Occupied”
2. बुनियादी निर्माण खंड
- ट्रैक डिवाइस (TD) – रेल वेब पर स्थापित चुंबकीय सेंसर जोड़ी; पहिये के फ्लैंज की धातु की मात्रा का पता लगाती है।
- इवैल्यूएटर (EVAL) – आउटडोर/लोकेशन बॉक्स जिसमें इवैल्यूएशन कार्ड होते हैं; एनालॉग व्हील पल्सों को डिजिटल “+1 / –1” काउंट्स में बदलता है।
- ट्रांसमिशन सिस्टम – रिले रूम तक ट्विस्टेड-पेयर/FO केबल।
- एक्सल काउंटर यूनिट (ACU) – इनडोर रैक जिसमें काउंटिंग/तुलना लॉजिक होता है; ट्रैक रिले (Vm-ACR) को चलाता है।
- रीसेट यूनिट – PRE (प्री-रीसेट) और SR (सेक्शन रीसेट) बटन जिनमें सील/कुंजी होती है।
- पावर सप्लाई – 24 V DC ±20 %, रिपल < 200 mV; बैटरी बैक-अप ≥ 8 h।
- सर्ज प्रोटेक्शन – क्लास-D, 10 kA 8/20 µs; रेल पोटेंशियल < 500 V।
3. कार्य सिद्धांत चरण-दर-चरण
| चरण | घटना | गणना | खंड स्थिति |
|---|---|---|---|
| 1 | पहला पहिया TD-1 से टकराता है | +1 | अधिकृत |
| 2 | ट्रेन चलती है, पहिए TD-1 से टकराते हैं | +1, +1 … | अधिकृत |
| 3 | अंतिम पहिया TD-2 को पार करता है | –1, –1 … | ? |
| 4 | गणना रजिस्टर = 0 | 0 | साफ़ (ACR उठाता है) |
| 5 | रजिस्टर ≠ 0 | +/– n | अधिकृत (ACR छोड़ता है) |
- न्यूनतम गति विश्वसनीय पहचान के लिए: 0.5 किमी/घंटा
- अधिकतम गति: 250 किमी/घंटा (मानक) / 400 किमी/घंटा (उच्च-गति संस्करण)
- पहिया संवेदक वायु-अंतराल: 35–55 मिमी; 30 मिमी ऊर्ध्वाधर रेल गति को सहन कर सकता है।
4. प्रमुख विनिर्देश (IRS: S99/2007 और EN 15595)
| पैरामीटर | मान |
|---|---|
| संचालन तापमान | –40 °C से +70 °C |
| TD का IP-रेटिंग | IP-68 |
| गणना क्षमता | ±16 383 एक्सल (15-बिट) |
| गलत गणना प्रायिकता | < 10⁻⁹ प्रति एक्सल |
| MTBF | ≥ 2.5 × 10⁵ घंटे |
| खंड लंबाई | 0.5 मी से 25 किमी (हर 5 किमी पर रिपीटर के साथ) |
| प्रतिरोध | ट्रैक्शन रिटर्न 750 A, 50 Hz; 100 A, 16⅔ Hz; 3 kV 1.2/50 µस सर्ज |
| सुरक्षा अखंडता | SIL-4 (CENELEC), फेल-सेफ (RDSO) |
5. ट्रैक सर्किट पर लाभ
- इंसुलेटेड रेल जॉइंट या इम्पीडेंस बॉन्ड की आवश्यकता नहीं – LWR ट्रैक के लिए आदर्श।
- जंग लगी रेल, खराब बैलास्ट, बाढ़, तेल, रेत, बर्फ, S&T बॉन्डिंग वायर चोरी से प्रभावित नहीं होता।
- लकड़ी, स्टील, कंक्रीट स्लीपर पर काम करता है; किसी भी फॉर्मेशन (मिट्टी, बैलास्ट, स्लैब) पर।
- एक TD बहुत छोटे सेक्शन (10 मी) के लिए उपयोग किया जा सकता है – 50 Hz TC के साथ असंभव।
- ट्रैक्शन हार्मोनिक्स गलत-साइड फेल्यर का कारण नहीं बनते।
6. सीमाएँ / कमियाँ
- टूटी रेल सुरक्षा नहीं (चलती लाइनों में TC अभी भी आवश्यक है, रेलवे बोर्ड पत्र 2007/T-21 के अनुसार)।
- काउंट फेल्यर (ड्रिफ्ट) को मैनुअल रीसेट की आवश्यकता होती है; देरी का कारण बनता है।
- प्रारंभिक लागत 50 Hz TC की तुलना में 1.5×, लेकिन जीवन-चक्र लागत कम है।
- सील्ड रीसेट आवश्यक – प्रक्रियात्मक सुरक्षा; मानव त्रुटि संभव है।
- शंटिंग मूवमेंट/रोल-बैक TD के विपरीत दिशा में पार होने पर गलत काउंट का कारण बन सकता है जब तक दिशा लॉजिक प्रदान नहीं किया जाता (IRS: S99 द्वि-दिशात्मक के लिए 4-सेंसर ऐरे की सिफारिश करता है)।
7. ऐतिहासिक मील के पत्थर
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1947 | स्विस संघीय रेलवे द्वारा पहला वाणिज्यिक एक्सल काउंटर (डेनिकर प्रणाली) स्थापित किया गया। |
| 1952 | डॉयचे बुंडेसबahn (DB) ने “स्पुरक्रांज-गेबर” (फ्लैंज संवेदक) को मानकीकृत किया। |
| 1975 | एकीकृत मूल्यांकक ट्रांजिस्टरयुक्त फेल-सेफ AND गेट के साथ (ABB)। |
| 1984 | RDSO ने पहली भारतीय विनिर्देश IRS: TC-41 जारी की (बाद में IRS: S99 में संशोधित)। |
| 1990 | भारतीय रेलवे पर 2 000 से अधिक सेक्शन कमीशन किए गए (मुख्य रूप से साइडिंग)। |
| 1998 | सीमेंस AzS350U द्वारा Sil-4 प्रमाणन प्राप्त किया गया। |
| 2003 | रेलवे बोर्ड ने चलने वाली लाइनों के लिए एक्सल काउंटरों को मंजूरी दी (TC के पूरक के रूप में)। |
| 2009 | स्पेनिश मैड्रिड–बार्सिलोना लाइन पर पहली उच्च-गति परीक्षण 350 किमी/घंटा पर (CSEE)। |
| 2017 | RDSO ने ऑटोमेटिक पुनः आरंभ के लिए दोहरी-संवेदक (4-संवेदक) संस्करण को मंजूरी दी (कोई PRE-रीसेट नहीं) – DACF (ड्रिफ्ट-मुक्त ऑटोमेटिक क्लियरेंस फीचर) कहा जाता है। |
| 2021 | भारतीय रेलवे ने 40 000 किमी ट्रैक को RMSA (रूट रिले इंटरलॉकिंग विथ एक्सल काउंटर) में बदलने के लिए वैश्विक निविदा जारी की “सिग्नल & टेलीकॉम वर्क्स” बजट ₹ 18 000 करोड़ के तहत। |
| 2023 | गति-शक्ति निर्देश: सभी ग्रीन-फील्ड DFC और भविष्य की HSR को एक्सल काउंटरों को प्राथमिक ब्लॉक-प्रूविंग उपकरण के रूप में अपनाना होगा। |
8. भारतीय रेलवे में प्रकार / प्रकारान्तर
- सिंगल-सेक्शन (पॉइंट) टाइप – सीमेंस AzS350U, अल्स्टॉम EbiTrack 500, केर्न माइक्रो-काउंटर।
- मल्टी-सेक्शन इवैल्यूएटर (MUX) – एक आउटडोर इवैल्यूएटर अधिकतम 4/8 सेक्शनों को संभालता है; केबल लागत घटाता है (मुंबई उपनगरीय में प्रयुक्त)।
- हाई-स्पीड (HS) संस्करण – विस्तारित आवृत्ति प्रतिक्रिया 2 kHz; 400 किमी/घंटा प्रमाणित (RDSO पत्र सं. EL/3.1.2/5 दिनांक 12.03.2019)।
- ऑटोमैटिक_रीस्टार्ट / DACF – सेंसरों की दूसरी जोड़ी का उपयोग करता है आत्म-सुधार के लिए; ड्रिफ्ट के कारण होने वाली 90 % दाहिने-पक्ष विफलताओं को समाप्त करता है।
- यूनिवर्सल एक्सल काउंटर (UAC) – IRSEM (रेलवे सिग्नलिंग एवं टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग मॉड्यूल) द्वारा स्वदेशी डिज़ाइन – ₹ 3.5 लाख प्रति सेक्शन (50 % आयात प्रतिस्थापन)।
9. इंस्टॉलेशन नियम (SEM/AC/2018 एवं सिग्नल इंजीनियरिंग मैनुअल)
- दो TDs के बीच न्यूनतम दूरी एक ही रेल में: 2 मी (क्रॉस-टॉक से बचने के लिए)।
- रेल जॉइंट से दूरी: ≥ 1 मी; S&T बॉन्ड से: ≥ 0.5 मी।
- TD के ऊपरी किनारे की ऊँचाई: रेल टेबल से 28 ±2 मिमी; रेल वेब से गैप: 45 ±5 मिमी।
- केबलिंग: 1.5 मिमी², 2-कोर ट्विस्टेड, शील्डेड, 500 V ग्रेड; लूप प्रतिरोध ≤ 25 Ω।
- अर्थिंग: TD बॉडी से स्ट्रक्चर अर्थ ≤ 4 Ω; इवैल्यूएटर से पावर अर्थ ≤ 1 Ω।
- रीसेट प्रक्रिया:
a) PRE (प्री-रीसेट) – स्टेशन मास्टर/कंट्रोलर द्वारा दिया जाता है।
b) SR (सेक्शन रीसेट) – केबिनमैन द्वारा सेक्शन का भौतिक निरीक्षण करने के बाद दिया जाता है।
c) कुंजियाँ इंटरलॉक्ड कुंजी-बॉक्स में सीलबंद होती हैं; घटना डेटा लॉगर में लॉग होती है।
10. हाल के अपडेट (2022-24)
- देशी “NavAC” जिसे BHEL और DMW ने “Make-III” श्रेणी के तहत विकसित किया; परीक्षण Lucknow NR में 2023 में पूरे हुए।
- RFID-आधारित रिडन्डेंट टैग जिसे RDSO ने व्हील-सेंसर ड्रिफ्ट को ऑटो-करेक्ट करने के लिए पेश किया – पायलट Tundla Jn. (2022) पर।
- इंटीग्रेटेड काउंटरकमTC मॉड्यूल (ICTM) – हाइब्रिड कार्ड जो AC और TC आउटपुट्स का फेल-सेफ OR देता है; मई 2023 में मंज़ूर हुआ।
- डिजिटल ट्विन: क्लाउड-आधारित Axle Counter Health Monitoring System (ACHMS) को Eastern DFC पर तैनात किया गया; MTBF की भविष्यवाणी 97 % सटीकता के साथ करता है।
- हरित पहल: सौर-संचालित 24 V 40 Ah LiFePO4 बैटरी पैक को NWR के रेगिस्तानी सेक्शनों (Jaisalmer–Barmer) में अपनाया गया, 1.2 लाख लीटर डीज़ल/वर्ष की बचत हो रही है।
11. MCQs के लिए त्वरित आँकड़े
- पहला भारतीय AC सेक्शन: Igatpuri Cabin-I siding (Central Railway) – 1984।
- सबसे लंबा AC सेक्शन: Son Nagar–Dildarnagar 23.4 km (ECR) – 2020 में कमीशन हुआ।
- IR पर कुल AC सेक्शन (मार्च 2024): 8 750 (siding 60 %, running 40 %)।
- Rashtriya Rail Sanraksha Kosh (RRSK) के तहत लक्ष्य: 15 000 km 2030 तक।
- प्रति running km लागत (2023 की कीमत स्तर): ₹ 6–8 लाख (50 Hz TC के ₹ 4 लाख की तुलना में)।
- प्रति सेक्शन बिजली खपत: 6 W (आउटडोर) + 12 W (इंडोर) = 18 W (1.5 W प्रति TC सेक्शन)।
- दुनिया का सबसे ऊँचा एक्सल काउंटर: 5 100 m amsl – Qinghai–Tibet railway (China) – CSEE सिस्टम।