वेल्डिंग विधियाँ
वेल्डिंग विधियाँ – भारतीय रेलवे परिप्रेक्ष्य
1. रेलवे पर वेल्डिंग का महत्व
- भारतीय रेलवे के 68,000 रूट-किमी में से 94 % वेल्डेड ट्रैक (LWR/CWR) है → फिश-प्लेटेड जोड़ समाप्त, रखरखाव और सवारी शोर कम।
- वेल्डेड टर्नआउट, पुल, वैगन और कोच → रिवेटेड संरचनाओं की तुलना में 30 % हल्के, 40 % मजबूत।
- वेल्डिंग दोष → रेल फ्रैक्चर के 17 % का कारण (रेलवे बोर्ड सुरक्षा रिपोर्ट 2022) → इसलिए वेल्डिंग JE/ALP/तकनीशियन के लिए एक श्रेणी-ए कौशल है।
2. रेल स्टील रसायन (वेल्डिंग हेतु)
| तत्व | IS:90 (52 kg), IRS-T-12 (60 kg) |
|---|---|
| C | 0.65–0.80 % |
| Mn | 0.90–1.30 % |
| Si | 0.15–0.30 % |
| P & S | ≤ 0.035 % |
| UTS | 880–980 MPa |
| कठोरता | 260–300 BHN |
उच्च कार्बन और मिश्र धातु → कठोरता और दरार संवेदनशीलता → वेल्डिंग प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।
3. आईआर पर प्रयुक्त वेल्डिंग प्रक्रियाओं का वर्गीकरण
A. संलयन वेल्डिंग (आधार धातु पिघलाती है)
- गैस प्रेशर वेल्डिंग (GPW) – थर्मिट® प्रक्रिया (एल्युमिनो-थर्मिक)
- इलेक्ट्रिक आर्क वेल्डिंग
- SMAW (मैनुअल मेटल आर्क) – इलेक्ट्रोड: AWS E11018-M
- GMAW (MIG/MAG) – ER90S-G तार, Ar+20 % CO₂
- FCAW – AWS E91T1-K2
- SAW – सबमर्ज्ड आर्क (टर्नआउट, पुल)
- फ्लैश-बट वेल्डिंग (FBW) – मोबाइल और स्थिर प्लांट
- इलेक्ट्रो-स्लैग / इलेक्ट्रो-गैस – मोटे वेब क्रॉसिंग
- लेजर, प्लाज्मा, EBW – मेट्रो और LHB कोच बॉडी (स्टेनलेस स्टील)
B. ठोस-अवस्था वेल्डिंग (पिघलाव नहीं)
- घर्षण वेल्डिंग – अल्स्टॉम LHB व्हील-एक्सल
- विस्फोटक वेल्डिंग – एल्युमिनियम छत से स्टील बॉडी के लिए संक्रमण जोड़
4. थर्मिट (गैस प्रेशर) वेल्डिंग – परीक्षाओं में सबसे अधिक पूछा जाता है
- आविष्कार 1895 – हंस गोल्डश्मिट – पहली रेल वेल्ड 1899 जर्मनी में; भारत 1928 GIPR पर।
- अभिक्रिया:
3 Fe₃O₄ + 8 Al → 9 Fe + 4 Al₂O₃ + 3.2 MJ kg⁻¹ (तापमान ≈ 2,400 °C) - मानक मात्रा: 450 g Fe₃O₄ + 90 g Al + 15 g Ni & Cr = एक क्रूसिबल 60 kg रेल के लिए।
- प्री-हीट तापमान: 900–1,000 °C (चेरी रेड) – ऑप्टिकल पाइरोमीटर या टेम्पिलिस्टिक° 980 द्वारा मापा जाता है।
- अंतर रखा जाता है: 25 mm ± 1 mm (भारतीय रेलवे परमानेंट वे मैनुअल 2021)।
- संरेखण सहनशीलता: ऊर्ध्वाधर ≤ 0.5 mm, पार्श्व ≤ 0.3 mm।
- अपसेट धातु (वेल्ड कॉलर) प्रक्षेपण: प्रत्येक तरफ 3–5 mm।
- शीतलन: 6 मिनट प्राकृतिक + 10 मिनट रेत ढकाव → उसके बाद ही 10 km/h पर यातायात; पूरी गति 1 घंटे/30 °C तापमान गिरने के बाद।
- स्वीकृति परीक्षण:
- USFD 100 % (2 MHz प्रोब)
- अनुप्रस्थ तन्यता ≥ 720 MPa
- 1.5 m मैंडरेल पर 120° बेन्ड बिना दरार के
- HAZ में कठोरता सर्वे ≤ 350 HV
- दोष दर लक्ष्य: ≤ 2 % (आरबी का “जीरो-वेल्ड-फेल्योर” अभियान 2023)।
हालिया आईआर पहल
- ऑटो-थर्मिट किट (RDSO 2017) – क्रूसिबल पूर्व-लोडेड, रिमोट द्वारा एक्जोथर्मिक स्टार्ट → वेल्डरों को धुएं के संपर्क में कमी।
- ग्रीन-थर्मिट – 30 % कम Al, Fe₃O₄ खर्च मिल-स्केल से प्राप्त → प्रति 1,000 वेल्ड 1.2 t CO₂ बचत।
5. फ्लैश-बट वेल्डिंग (FBW) – फैक्ट्री और SFW पैड
- कैसर का 1924 पेटेंट; भारतीय रेलवे का पहला प्लांट 1963 भिलाई स्टील प्लांट में।
- सिद्धांत: जूल तापन I²Rt + फोर्जिंग अपसेट 6–8 mm।
- 60 kg रेल (UIC-60) के लिए पैरामीटर:
- फ्लैश वोल्टेज: 3–6 V
- करंट: 55–65 kA
- अपसेट बल: 450 kN
- कुल चक्र: 120–150 s
- हीट-अफेक्टेड जोन (HAZ) चौड़ाई: 25–30 mm (थर्मिट से आधा)।
- मानक: IRS-T-18-2019 (अनंतिम) और EN 14587-2।
- NRC (ग्रीनफील्ड) और RRTS “कवच” कॉरिडोर: 100 % FBW रेल।
- मोबाइल फ्लैश-बट वेल्डिंग प्लांट (RDSO 2022) – 25 t स्व-चालित – चालू ट्रैक पर 60 वेल्ड/दिन कर सकता है → कब्जे के समय में 70 % कमी।
6. रोलिंग स्टॉक के लिए SMAW और GMAW
- मालगाड़ी वैगन (IRSM-44 स्टील) के लिए इलेक्ट्रोड: AWS E7018 (4 mm Ø) – 160 A DC+।
- LHB कोच शेल (स्टेनलेस स्टील 301LN): GMAW-शॉर्ट सर्किट, 1.2 mm ER308LSi, 24 V, 180 A, 60 % Ar + 30 % He + 10 % CO₂।
- WPS IS 7310 भाग 1 और AWS D1.1/D1.6 के अनुसार योग्य।
- वेल्डर प्रमाणन: BIS-5284 (पूर्व में CITI) – 2 वर्ष वैध, 6-मासिक नवीनीकरण परीक्षण।
7. दोष, प्रतीक और NDT
| दोष | कारण | NDT | स्वीकार्य सीमा |
|---|---|---|---|
| पैठ की कमी | कम प्री-हीट | USFD | शून्य |
| स्लैग समावेशन | तेज यात्रा | रेडियोग्राफी | ≤ 3 mm किसी भी दिशा में |
| सरंध्रता | नम इलेक्ट्रोड | UT/X-ray | ≤ 2 % क्षेत्र |
| अंडरकट | उच्च करंट | MPI | ≤ 0.5 mm गहरा |
| कोल्ड शट (थर्मिट) | गलत संरेखण | UT | अनुमति नहीं |
8. सुरक्षा और पर्यावरणीय आँकड़े
- आईआर ~22,000 प्रमाणित वेल्डरों को रोजगार देता है (2023)।
- “वेल्ड-क्लाउड” ऐप (CRIS 2021) – प्रत्येक थर्मिट वेल्ड जियो-टैग्ड, तापमान और USFD रिपोर्ट अपलोड करता है → विफलता-विश्लेषण डेटाबेस।
- हेक्स-क्रोम एक्सपोजर सीमा (SS पर GMAW): 0.05 mg m⁻³ (फैक्ट्रीज एक्ट 2020)।
- आग का जोखिम: थर्मिट क्रूसिबल तापमान > 2,000 °C – अनिवार्य रूप से “वेल्ड-जोन” में किया जाता है लकड़ी के स्लीपरों से 5 m दूर; पानी की बाल्टी और 2 DCP अग्निशामक रखे जाते हैं।
9. ऐतिहासिक समयरेखा (स्मृति सुझाव)
- 1895 – गोल्डश्मिट ने थर्मिट का आविष्कार किया
- 1928 – पहली भारतीय रेल वेल्ड (GIPR)
- 1963 – भिलाई FBW प्लांट
- 1998 – BG पर LWR अनिवार्य बना
- 2010 – RDSO ने SKV-E (सुधरी) मोल्ड को मंजूरी दी
- 2017 – ऑटो-थर्मिट किट
- 2020 – मोबाइल FBW प्लांट परीक्षण
- 2022 – RDSO ने मरम्मत के लिए “वाइड-गैप थर्मिट” (60 mm गैप तक) की अनुमति दी
10. भविष्य / हाल के अपडेट (2023-24)
- “फ्रिक्शन-स्टिर वेल्डिंग” 6061-T6 एल्युमिनियम रूफ पैनल की – रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला में सफल परीक्षण – 40 % जोड़ शक्ति ↑, कोई धुआं नहीं।
- “रेलबॉट-डब्ल्यू” – DMRL और IR द्वारा विकासाधीन – फील्ड वेल्ड के लिए AI-निर्देशित “नैरो-गैप लेजर-MAG हाइब्रिड”; अपेक्षित 2026।
- ग्रीन-हाइड्रोजन गैस प्री-हीटिंग के लिए एसिटिलीन के बजाय (IROAF पायलट) → प्रति वेल्ड 2.5 kg CO₂ बचत।
वेल्डिंग विधियों पर 15+ रेलवे-परीक्षा MCQs
-
रेलों की थर्मिट वेल्डिंग में किस अभिक्रिया मिश्रण का उपयोग किया जाता है? A) Fe₂O₃ + Al B) Fe₃O₄ + Al C) FeO + Al D) Fe + Al₂O₃
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सही उत्तर: B स्पष्टीकरण: रेलों की थर्मिट वेल्डिंग में प्रयुक्त अभिक्रिया मिश्रण में आमतौर पर आयरन ऑक्साइड (Fe₃O₄) और एल्युमिनियम (Al) पाउडर होता है। -
थर्मिट धातु डालने से पहले आवश्यक प्री-हीटिंग तापमान लगभग है A) 600–700 °C B) 700–800 °C C) 900–1,000 °C D) 1,100–1,200 °C
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सही उत्तर: C स्पष्टीकरण: पिघली हुई थर्मिट स्टील के साथ उचित संलयन सुनिश्चित करने के लिए रेल सिरों को लगभग 900–1,000 °C तक प्री-हीट किया जाना चाहिए। -
थर्मिट वेल्डिंग के दौरान रेल सिरों के बीच रखा जाने वाला मानक अंतर है A) 25 mm ± 1 mm B) 20 mm ± 1 mm C) 30 mm ± 1 mm D) 15 mm ± 1 mm
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सही उत्तर: A स्पष्टीकरण: पिघली हुई धातु को प्रवाहित होने और रेल सिरों को प्रभावी ढंग से जोड़ने की अनुमति देने के लिए 25 mm ± 1 mm का मानक अंतर बनाए रखा जाता है। -
रेलों पर HAZ (हीट अफेक्टेड जोन) की सबसे छोटी चौड़ाई कौन सी वेल्डिंग प्रक्रिया देती है? A) थर्मिट वेल्डिंग B) गैस प्रेशर वेल्डिंग C) आर्क वेल्डिंग D) फ्लैश-बट वेल्डिंग
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सही उत्तर: D स्पष्टीकरण: फ्लैश-बट वेल्डिंग तीव्र स्थानीकृत ताप और दबाव का उपयोग करती है, जिसके परिणामस्वरूप अन्य विधियों की तुलना में सबसे संकीर्ण हीट अफेक्टेड जोन होता है। -
भारतीय रेलवे में पहली रेल वेल्ड वर्ष में की गई थी A) 1910 B) 1928 C) 1947 D) 1952
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सही उत्तर: B स्पष्टीकरण: इतिहास में भारतीय रेलवे प्रणाली पर रेल वेल्डिंग का पहला उदाहरण 1928 में दर्ज है। -
60 kg UIC रेल की फ्लैश-बट वेल्डिंग के लिए आवश्यक करंट लगभग है A) 25–35 kA B) 40–50 kA C) 55–65 kA D) 70–80 kA
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सही उत्तर: C स्पष्टीकरण: 60 kg UIC रेल सेक्शन के लिए आवश्यक ऊष्मा प्राप्त करने के लिए, 55–65 kA की सीमा में एक उच्च करंट की आवश्यकता होती है। -
IRSM-44 मालगाड़ी वैगन अंडरफ्रेम की वेल्डिंग के लिए किस इलेक्ट्रोड की सिफारिश की जाती है? A) AWS E7018 B) AWS E6013 C) AWS E6011 D) AWS E8018
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सही उत्तर: A स्पष्टीकरण: AWS E7018 एक लो-हाइड्रोजन कार्बन स्टील इलेक्ट्रोड है जिसका उपयोग आमतौर पर रेलवे वैगनों में उच्च गुणवत्ता वाली संरचनात्मक वेल्डिंग के लिए किया जाता है। -
एक थर्मिट वेल्ड जोड़ के लिए स्वीकृत न्यूनतम अनुप्रस्थ तन्य शक्ति है A) 600 MPa B) 720 MPa C) 850 MPa D) 900 MPa
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सही उत्तर: B स्पष्टीकरण: मानक विनिर्देशों के अनुसार, एक थर्मिट वेल्ड में न्यूनतम 720 MPa की अनुप्रस्थ तन्य शक्ति प्रदर्शित होनी चाहिए। -
फील्ड थर्मिट वेल्ड के 100 % निरीक्षण के लिए कौन सी NDT तकनीक अनिवार्य है? A) मैग्नेटिक पार्टिकल इंस्पेक्शन B) रेडियोग्राफी C) USFD (अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन) D) डाई पेनेट्रेंट टेस्ट
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सही उत्तर: C स्पष्टीकरण: USFD भारतीय रेलवे पर थर्मिट वेल्ड में आंतरिक दोषों का पता लगाने के लिए उपयोग की जाने वाली अनिवार्य गैर-विनाशकारी परीक्षण विधि है। -
60 kg रेल की फ्लैश-बट वेल्डिंग के दौरान लगाया गया अपसेट बल लगभग है A) 200 kN B) 300 kN C) 350 kN D) 450 kN
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सही उत्तर: D स्पष्टीकरण: फ्लैश-बट वेल्डिंग के अंतिम चरण के दौरान रेल सिरों को एक साथ जोड़ने के लिए लगभग 450 kN का अपसेट बल लगाया जाता है। -
स्टेनलेस-स्टील कोच बॉडी के GMAW में निम्नलिखित में से किस गैस का उपयोग नहीं किया जाता है? A) 100 % CO₂ B) आर्गन + 2% O₂ C) आर्गन + CO₂ मिश्रण D) शुद्ध आर्गन
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सही उत्तर: A स्पष्टीकरण: 100 % CO₂ का उपयोग स्टेनलेस स्टील के लिए नहीं किया जाता है क्योंकि इससे वेल्ड पूल में अत्यधिक स्पैटर और अवांछित कार्बन पिक-अप होता है। -
RDSO द्वारा पेश किया गया ऑटो-थर्मिट किट कम करता है A) रेल अंतर B) धुएं का संपर्क और शुरुआती समय C) वेल्डिंग तापमान D) Al पाउडर की लागत
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सही उत्तर: B स्पष्टीकरण: ऑटो-थर्मिट सिस्टम को कार्यकर्ताओं के धुएं के संपर्क को कम करके और समग्र प्रक्रिया शुरुआती समय को कम करके सुरक्षा में सुधार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। -
आईआर के तहत “रेलबॉट-डब्ल्यू” परियोजना का उद्देश्य किस उन्नत वेल्डिंग प्रौद्योगिकी का उपयोग करना है? A) प्लाज्मा आर्क वेल्डिंग B) फ्रिक्शन स्टिर वेल्डिंग C) लेजर-MAG हाइब्रिड वेल्डिंग D) इलेक्ट्रॉन बीम वेल्डिंग
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सही उत्तर: C स्पष्टीकरण: रेलबॉट-डब्ल्यू एक शोध पहल है जो लेजर-मेटल एक्टिव गैस (MAG) हाइब्रिड प्रौद्योगिकी का उपयोग करके रेल वेल्डिंग के स्वचालन पर केंद्रित है। -
थर्मिट वेल्डिंग में अपर्याप्त प्री-हीटिंग के साथ कौन सा दोष सबसे अधिक संभावित है? A) पैठ की कमी B) स्लैग समावेशन C) सरंध्रता D) संकुचन गुहा
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सही उत्तर: A स्पष्टीकरण: अपर्याप्त प्री-हीटिंग रेल सिरों को संलयन तापमान तक पहुंचने से रोकती है, जिससे “पैठ की कमी” या “कोल्ड लैप” दोष होता है। -
रेल थर्मिट वेल्ड के हीट-अफेक्टेड जोन (HAZ) में अनुमत कठोरता है A) ≤ 250 HV B) ≤ 350 HV C) ≤ 450 HV D) ≤ 500 HV
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सही उत्तर: B स्पष्टीकरण: भंगुरता को रोकने के लिए, थर्मिट वेल्ड के हीट-अफेक्टेड जोन में कठोरता आम तौर पर 350 HV या उससे कम तक सीमित होती है। -
मोबाइल फ्लैश-बट वेल्डिंग प्लांट चालू ट्रैक पर प्रति दिन कितने वेल्ड पूरे कर सकता है? A) ~20 वेल्ड B) ~40 वेल्ड C) ~60 वेल्ड D) ~100 वेल्ड
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सही उत्तर: C स्पष्टीकरण: उच्च दक्षता वाले मोबाइल प्लांट यातायात ब्लॉक के आधार पर प्रति दिन लगभग 60 वेल्ड करने में सक्षम हैं। -
भारतीय रेलवे के लिए “वेल्ड-क्लाउड” ऐप किस संगठन ने विकसित किया? A) RDSO B) RITES C) RVNL D) CRIS
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सही उत्तर: D स्पष्टीकरण: सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) ने वेल्ड की डिजिटल निगरानी और डेटा लॉगिंग के लिए वेल्ड-क्लाउड एप्लिकेशन विकसित किया।