राजकोषीय नीति
राजकोष नीति
1. परिचय
1.1 परिभाषा
- राजकोष नीति सरकारी खर्च और कराधान का उपयोग अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के लिए करती है।
- यह समष्टि-अर्थशास्त्रीय प्रबंधन का एक प्रमुख साधन है।
1.2 उद्देश्य
- अर्थव्यवस्था को स्थिर करना
- आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देना
- मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना
- बेरोज़गारी को कम करना
- आय की समान वितरण प्राप्त करना
1.3 प्रमुख खिलाड़ी
- केंद्र सरकार
- संसद
- वित्त मंत्रालय
- बजट समिति
1.4 ऐतिहासिक संदर्भ
- 1930 के दशक: जॉन मेनार्ड कीन्स ने कीन्सियन राजकोष नीति की अवधारणा प्रस्तुत की।
- WWII के बाद: सरकारों ने विस्तारवादी राजकोष नीति को पुनर्प्राप्ति को प्रोत्साहित करने के लिए अपनाया।
- 1970-80 के दशक: मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए संकुचनवादी राजकोष नीति की ओर रुझान।
- 2008 वैश्विक वित्तीय संकट: अर्थव्यवस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए विस्तारवादी राजकोष नीति का उपयोग किया गया।
1.5 राजकोष नीति बनाम मौद्रिक नीति
| पहलू | राजकोष नीति | मौद्रिक नीति |
|---|---|---|
| साधन | सरकारी खर्च, कराधान | ब्याज दर, मुद्रा आपूर्ति |
| क्रियान्वित कर्ता | वित्त मंत्रालय, संसद | केंद्रीय बैंक |
| केंद्रबिंदु | कुल मांग पर प्रत्यक्ष प्रभाव | ब्याज दरों के माध्यम से अप्रत्यक्ष प्रभाव |
2. राजकोष नीति के प्रकार
2.1 विस्तारी वित्तीय नीति
- परिभाषा: आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए सरकारी खर्च में वृद्धि या करों में कटौती।
- उदाहरण:
- नई सार्वजनिक परियोजनाएं (जैसे कि बुनियादी ढांचा)
- आय या कॉर्पोरेट करों में कटौती
- प्रभाव: मांग को उत्तेजित करता है, जीडीपी बढ़ाता है, मुद्रास्फीति हो सकती है।
- इसका उपयोग कब होता है:
- मंदी
- आर्थिक मंदी
- उच्च बेरोजगारी
2.2 संकुचनकारी वित्तीय नीति
- परिभाषा: मुद्रास्फीति को कम करने के लिए सरकारी खर्च में कटौती या करों में वृद्धि।
- उदाहरण:
- सार्वजनिक सेवाओं में बजट कटौती
- उच्च आयकर दरें
- प्रभाव: मांग घटाता है, मुद्रास्फीति कम करता है, आर्थिक वृद्धि धीमी हो सकती है।
- इसका उपयोग कब होता है:
- उच्च मुद्रास्फीति
- बजट घाटा
- अति-गरम अर्थव्यवस्था
2.3 तटस्थ वित्तीय नीति
- परिभाषा: सरकार संतुलित बजट बनाए रखती है, न तो खर्च बढ़ाती है और न घटाती है।
- उद्देश्य: आर्थिक स्थिरता बनाए रखना।
- इसका उपयोग कब होता है:
- जब अर्थव्यवस्था पूरी क्षमता पर हो
- जब मुद्रास्फीति नियंत्रण में हो
- जब बेरोजगारी कम हो
2.4 विवेकपूर्ण बनाम स्वचालित वित्तीय नीति
| प्रकार | विवरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| विवेकपूर्ण | सरकार द्वारा लिए गए नीति निर्णय | मंदी के दौरान घोषित कर कटौती |
| स्वचालित | आर्थिक परिस्थितियों के साथ स्वचालित रूप से समायोजित होने वाली नीतियां | मंदी के दौरान बेरोजगारी लाभ में वृद्धि |
3. अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
3.1 आर्थिक विकास
- विस्तारी नीति अल्पकाल में GDP बढ़ा सकती है।
- संकुचन नीति विकास को धीमा कर सकती है, परंतु दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को स्थिर करती है।
3.2 मुद्रास्फीति
- विस्तारी नीति मांग आपूर्ति से आगे निकल जाए तो मुद्रास्फीति को जन्म दे सकती है।
- संकुचन नीति मांग घटाकर मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद करती है।
3.3 रोज़गार
- विस्तारी नीति सरकारी खर्च बढ़ाती है, जिससे रोज़गार सृजित होता है।
- संकुचन नीति सार्वजनिक खर्च घटने पर रोज़गार घटा सकती है।
3.4 सार्वजनिक ऋण
- विस्तारी राजकोष नीति प्रायः सार्वजनिक ऋण बढ़ाती है।
- संकुचन राजकोष नीति बजट घाटे को घटाने में सहायक होती है।
3.5 आय वितरण
- प्रगतिशील कराधान और सार्वजनिक खर्च असमानता घटा सकते हैं।
- प्रतिगामी कराधान आय अंतराल को बढ़ा सकता है।
3.6 भारतीय संदर्भ से उदाहरण
| नीति | उदाहरण | प्रभाव |
|---|---|---|
| विस्तारी | 2009-10 का बजट (उदय कोटक) | सार्वजनिक निवेश बढ़ा, बेरोज़गारी घटी |
| संकुचन | 1991 के आर्थिक सुधार | राजकोषीय घाटा घटा, मुद्रास्फीति नियंत्रित हुई |
| तटस्थ | 2014-15 का बजट (अरुंधति भट्टाचार्य) | राजकोषीय अनुशासन बनाए रखा, विकास को बढ़ावा दिया |
3.7 परीक्षाओं के लिए प्रमुख तथ्य (SSC, RRB)
- राजकोष नीति समष्टि-आर्थिक प्रबंधन का एक साधन है।
- केन्सियन सिद्धांत विस्तारक राजकोष नीति का आधार बनाता है।
- विवेकाधीन राजकोष नीति मंदी के दौरान प्रयोग की जाती है।
- स्वचालित राजकोष नीति में बेरोज़गारी भत्ते और सामाजिक सुरक्षा शामिल हैं।
- संकुचनकारी राजकोष नीति मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए प्रयोग की जाती है।
- राजकोषीय घाटा सरकारी व्यय और राजस्व के बीच का अंतर है।
- राजस्व घाटा राजस्व प्राप्तियों और राजस्व व्यय के बीच की खाई है।
3.8 महत्वपूर्ण पद
- राजकोषीय घाटा: व्यय > राजस्व
- राजस्व घाटा: राजस्व व्यय > राजस्व प्राप्तियाँ
- प्राथमिक घाटा: राजकोषीय घाटा - ब्याज भुगतान
- पूँजीगत व्यय: बुनियादी ढाँचे, मशीनरी आदि पर खर्च
- राजस्व व्यय: वेतन, सब्सिडी आदि पर खर्च
3.9 अंतर
| पहलू | विस्तारक | संकुचनकारी |
|---|---|---|
| खर्च | बढ़ाया जाता है | घटाया जाता है |
| कर | घटाए जाते हैं | बढ़ाए जाते हैं |
| अर्थव्यवस्था पर प्रभाव | वृद्धि को प्रोत्साहित करता है | मुद्रास्फीति को नियंत्रित करता है |
| कब प्रयोग होता है | मंदी | मुद्रास्फीति |
| रोज़गार पर प्रभाव | बढ़ाता है | घटाता है |
3.10 सारणी सारांश
| नीति प्रकार | उपकरण | प्रभाव | उपयोग कब |
|---|---|---|---|
| विस्तारवादी | खर्च में वृद्धि, कर में कटौती | वृद्धि को बढ़ावा, रोज़गार | मंदी, सुस्ती |
| संकुचनवादी | खर्च में कटौती, कर में वृद्धि | मुद्रास्फीति को नियंत्रित करता है | मुद्रास्फीति, अति-ताप |
| तटस्थ | संतुलित बजट | स्थिर अर्थव्यवस्था | पूर्ण रोज़गार, स्थिर मुद्रास्फीति |