ब्रिटिश नीतियां
भारत में ब्रिटिश नीतियाँ
ब्रिटिश नीतियाँ
सब्सिडियरी गठबंधन
- परिभाषा: एक राजनीतिक रणनीति जिसे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारतीय राज्यों पर सीधे कब्ज़ा किए बिना नियंत्रण बढ़ाने के लिए अपनाया।
- उद्देश्य: भारतीय शासकों की वफादारी सुनिश्चित करना और सैन्य तथा आर्थिक संसाधनों तक पहुंच सुरक्षित करना।
- मुख्य विशेषताएँ:
- भारतीय शासकों को ब्रिटिश सैन्य संरक्षण स्वीकार करना पड़ता था।
- उन्हें अपने क्षेत्र में एक ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ रखना पड़ता था।
- उन्हें अन्य शक्तियों के साथ गठबंधन करने की अनुमति नहीं थी।
- उन्हें ब्रिटिश सैनिकों के रखरखाव का खर्च वहन करना पड़ता था।
- प्रभाव:
- भारतीय राज्यों की संप्रभुता कमजोर हुई।
- ब्रिटिशों को धीरे-धीरे अपना प्रभाव बढ़ाने में सक्षम बनाया।
- उदाहरण:
- अवध के नवाब (1801): सब्सिडियरी गठबंधन में शामिल हुए।
- हैदराबाद के निज़ाम (1798): ब्रिटिशों के अधीन संरक्षित राज्य बन गए।
- मुख्य तिथि: 1798 – लॉर्ड वेलेजली द्वारा सब्सिडियरी गठबंधन प्रणाली को औपचारिक रूप दिया गया।
- परीक्षा तथ्य: सब्सिडियरी गठबंधन एसएससी और आरआरबी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाने वाला विषय है, जिसे प्रायः लॉर्ड वेलेजली के कार्यकाल से जोड़ा जाता है।
रिंग ऑफ फेंस
- परिभाषा: भारतीय राज्यों को ब्रिटिश-नियंत्रित क्षेत्रों से घेरने की नीति ताकि उन्हें अलग-थलग करके रोका जा सके और उन पर अंकुश लगाया जा सके।
- उद्देश्य: किसी शक्तिशाली भारतीय राज्य के उदय को रोकना जो ब्रिटिश सर्वोच्चता को चुनौती दे सके।
- कार्यान्वयन:
- ब्रिटिशों ने भारतीय उपमहाद्वीप के चारों ओर प्रमुख क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित किया।
- इसमें पंजाब, अवध और डेकन के कुछ हिस्सों के विलय शामिल थे।
- ब्रिटिशों ने इसे हासिल करने के लिए सैन्य बल और राजनीतिक चालबाजी का इस्तेमाल किया।
- प्रभाव:
- ब्रिटिश-नियंत्रित क्षेत्रों के चारों ओर एक बफर ज़ोन बनाया गया।
- भारतीय राज्यों की ब्रिटिश विस्तार का विरोध करने या गठबंधन बनाने की क्षमता घट गई।
- मुख्य तिथि: 1848 – पंजाब का विलय द्वितीय अंग्रेज़-सिख युद्ध के बाद एक महत्वपूर्ण कदम था।
- परीक्षा तथ्य: रिंग ऑफ़ फ़ेंस को अक्सर ब्रिटिश सत्ता को मज़बूत करने की रणनीति से जोड़ा जाता है और यह प्रतियोगी परीक्षाओं में एक सामान्य विषय है।
डॉक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स
- परिभाषा: लॉर्ड डलहौसी द्वारा प्रस्तुत एक नीति जिससे ऐसे भारतीय राज्यों को जोड़ा गया जिनमें पुरुष उत्तराधिकारी नहीं था।
- उद्देश्य: ब्रिटिश क्षेत्रीय नियंत्रण का विस्तार करना और संभावित प्रतिद्वंद्वियों को समाप्त करना।
- मुख्य प्रावधान:
- यदि कोई शासक पुरुष उत्तराधिकारी के बिना मर जाता, तो राज्य को ब्रिटिश द्वारा जोड़ लिया जाता।
- यह सिद्धांत हिंदू और मुस्लिम दोनों राज्यों पर लागू होता था।
- इसका उपयोग विभिन्न रियासतों के विलय को औचित्य देने के लिए किया गया।
- उदाहरण:
- सतारा (1848): शासक की पुरुष उत्तराधिकारी के बिना मृत्यु के कारण जोड़ा गया।
- झांसी (1854): रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु के बाद जोड़ा गया।
- तंजावुर (1855): इस सिद्धांत के तहत जोड़ा गया।
- प्रभाव:
- भारतीय शासकों और प्रजा में व्यापक असंतोष उत्पन्न हुआ।
- इसने प्रथम अंग्रेज़-अफ़ग़ान युद्ध और 1857 का भारतीय विद्रोह की ओर ले जाने वाले असंतोष को बढ़ावा दिया।
- मुख्य तिथि: 1848 – लॉर्ड डलहौसी द्वारा लैप्स सिद्धांत प्रस्तुत किया गया।
- परीक्षा तथ्य: लैप्स सिद्धांत SSC और RRB परीक्षाओं के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसे अक्सर 1857 के विद्रोह और लॉर्ड डलहौसी के कार्यकाल से जोड़ा जाता है।
तुलना सारणी
| नीति | उद्देश्य | प्रमुख विशेषताएँ | भारतीय राज्यों पर प्रभाव | प्रमुख तिथि |
|---|---|---|---|---|
| सहायक गठबंधन | वफादारी और सैन्य पहुंच सुनिश्चित करना | सैन्य सुरक्षा, ब्रिटिश कमांडर | संप्रभुता कमजोर हुई, नियंत्रण बढ़ा | 1801 |
| घेरे की वलय | भारतीय राज्यों को घेरना और अलग करना | बफर ज़ोन, सैन्य घेराबंदी | गठबंधन की संभावना घटी | 1848 |
| हरण सिद्धांत | ब्रिटिश क्षेत्र का विस्तार करना | पुरुष वारिस के बिना विलय | असंतोष पैदा हुआ, 1857 विद्रोह का कारण बना | 1848 |