भूगोल

भारत के राज्य:
  • अरुणाचल प्रदेश
  • असम
  • बिहार
  • छत्तीसगढ़
  • गोवा
  • गुजरात
  • हरियाणा
  • हिमाचल प्रदेश
  • झारखंड
  • कर्नाटक
  • केरल
  • मध्य प्रदेश
  • महाराष्ट्र
  • मणिपुर
  • मेघालय
  • मिजोरम
  • नगालैंड
  • ओडिशा
  • पंजाब
  • राजस्थान
  • सिक्किम
  • तमिलनाडु
  • तेलंगाना
  • त्रिपुरा
  • उत्तराखंड
  • उत्तर प्रदेश
  • पश्चिम बंगाल
भारत के केंद्र शासित प्रदेश:
  • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
  • चंडीगढ़
  • दादरा और नगर हवेली
  • दमन और दीव
  • दिल्ली
  • लक्षद्वीप
  • पुडुचेरी
  • जम्मू और कश्मीर
भारत की भौगोलिक विशेषताएँ:
  • भारत दक्षिण एशिया में स्थित है और हिमालय तथा समुद्र द्वारा शेष एशिया से अलग है।
  • यह क्षेत्रफल के लिहाज़ से दुनिया का सातवाँ सबसे बड़ा देश है और इसकी जनसंख्या 1.3 अरब से अधिक है, जिससे यह दुनिया का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बनता है।
  • भारत भारतीय प्लेट पर स्थित है और इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट का भाग है।
क्षेत्रफल के आधार पर दुनिया के सबसे बड़े देश हैं:
  • रूस (17,124,442 वर्ग किलोमीटर)
  • कनाडा (9,984,670 वर्ग किलोमीटर)
  • चीन (9,706,961 वर्ग किलोमीटर)
  • संयुक्त राज्य अमेरिका (9,629,091 वर्ग किलोमीटर)
  • ब्राज़ील (8,515,767 वर्ग किलोमीटर)
  • ऑस्ट्रेलिया (7,692,924 वर्ग किलोमीटर)
भारत का क्षेत्रफल:
  • भारत का कुल क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किलोमीटर है।
  • भूमि क्षेत्र: 29,73,193 वर्ग किलोमीटर
  • जल क्षेत्र: 3,14,070 वर्ग किलोमीटर
  • भारत का जल क्षेत्र इसके कुल क्षेत्रफल का लगभग 9.55% है।
तुलनाएँ:
  • भारत संयुक्त राज्य अमेरिका से 12 गुना बड़ा है।
  • भारत जापान से 8 गुना बड़ा है।
  • भारत यूरोपीय संघ (सभी 28 सदस्य राष्ट्रों को मिलाकर) के आकार का लगभग 3/4 है।
  • कन्याकुमारी भारत के मुख्य भूमि का सबसे दक्षिणी बिंदु है। यह वह स्थान है जहाँ तीन समुद्र मिलते हैं और यह भारतीय महासागर में समाप्त होने से पहले संकीर्ण होता है। भारत का वास्तविक सबसे दक्षिणी बिंदु इंदिरा पॉइंट है, जो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित है, इंडोनेशिया के पास। हालाँकि, इंदिरा पॉइंट 2004 की सुनामी के दौरान जलमग्न हो गया था।
  • लक्षद्वीप द्वीप समूह ऐसे द्वीप समूह हैं जो भारतीय तट के अन्य द्वीप समूहों की तुलना में अधिक निकट हैं।
  • भारत का तटरेखा बहुत लंबा है, जो लगभग पृथ्वी की त्रिज्या के बराबर है।
  • भारत में उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम की दूरी डिग्री में लगभग समान है (लगभग 30 डिग्री), लेकिन किलोमीटर में उत्तर-दक्षिण दूरी (लगभग 3200 किमी) पूर्व-पश्चिम दूरी (लगभग 3000 किमी) से अधिक है।
  • चूँकि भारत पूर्व से पश्चिम तक बहुत फैला हुआ है, इसलिए पूर्वी और पश्चिमी बिंदुओं के बीच दो घंटे का समय अंतर है।
  • भारत का मानक मेरिडियन (82 डिग्री 30 मिनट पूर्व) कर्क रेखा से होकर गुजरता है, एक काल्पनिक रेखा जो भूमध्य रेखा से 23 डिग्री 30 मिनट उत्तर में स्थित है, भारत को लगभग दो बराबर भागों में विभाजित करती है।
  • उत्तर भाग एक विशाल क्षेत्र है जो पूर्व से पश्चिम तक फैला हुआ है, जो समतल मैदानों और शानदार हिमालय पर्वतों से बना है।
  • कर्क रेखा के नीचे का दक्षिण भाग त्रिकोण के आकार का है, जिसका आधार उत्तर में है और नोक दक्षिण की ओर इशारा करती है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय पठार से बना है, लेकिन इसमें पूर्व और पश्चिम पर तटीय क्षेत्र भी शामिल हैं।
  • पश्चिम में गुजरात राज्य से पूर्व में अरुणाचल प्रदेश राज्य तक, समय में दो घंटे का अंतर है। एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए, भारत के मानक मेरिडियन (82 डिग्री 30 मिनट पूर्व) के साथ समय, जो उत्तर प्रदेश राज्य के मिर्जापुर से होकर गुजरता है, को पूरे देश के लिए मानक समय माना जाता है।
  • जैसे-जैसे आप भारत में दक्षिण से उत्तर की ओर बढ़ते हैं, दिन और रात की लंबाई में परिवर्तन होता है क्योंकि देश की अक्षांशीय सीमा (भूमध्य रेखा के सापेक्ष इसकी स्थिति) है।
  • भारत की मुख्य भूमि की तटरेखा, अंडमान, निकोबार और लक्षद्वीप द्वीप समूहों को छोड़कर, लगभग 5,423 किलोमीटर तक फैली हुई है।
  • भारत में उत्तर से दक्षिण की दूरी लगभग 2093.6 किलोमीटर है।
  • भारत की मुख्य भूमि के तट पर विभिन्न प्रकार के समुद्र तट हैं। लगभग 43% तट रेतीला है, 11% चट्टानी है जिसमें चट्टानें हैं, और 46% दलदली है।
  • भारत का सबसे ऊँचा बिंदु K2 है, जो 8611 मीटर ऊँचा है। हालाँकि, K2 गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में स्थित है, जो वर्तमान में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का हिस्सा है। सिक्किम में कंचनजंघा भारत की वर्तमान सीमाओं के भीतर सबसे ऊँचा बिंदा है, और यह 8598 मीटर ऊँचा है।
  • थार रेगिस्तान दुनिया का नौवाँ सबसे बड़ा उपोष्ण रेगिस्तान है। यह 200,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • थार रेगिस्तान की मिट्टी बालू से लेकर बालू-दोमट बनावट की है।
  • भारत दक्षिण में हिंद महासागर, दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर और दक्षिण-पूर्व में बंगाल की खाड़ी से घिरा हुआ है।
  • भारत की सीमांत जल सीमा समुद्र में 12 समुद्री मील (लगभग 22.2 किलोमीटर) तक फैली हुई है।
  • मालदीव, श्रीलंका और इंडोनेशिया भारत के दक्षिण में स्थित द्वीप राष्ट्र हैं।
आयाम:
  • उत्तर से दक्षिण की दूरी: 3214 किलोमीटर
  • पूर्व से पश्चिम की दूरी: 2933 किलोमीटर
  • समुद्रतट की लंबाई: 7516.6 किलोमीटर
  • स्थलीय सीमा की लंबाई: 15,200 किलोमीटर
  • कुल भौगोलिक भू-क्षेत्र: 32,87,263 वर्ग किलोमीटर
  • पृथ्वी की सतह का भारत द्वारा कवर किया गया प्रतिशत: 2.4%
  • विश्व की जनसंख्या का भारत में निवास करने का प्रतिशत: 17.5%
  • भारत की क्षेत्रीय समुद्री सीमा: 12 समुद्री मील
  • भारत की संलग्न क्षेत्र: 24 समुद्री मील
  • भारत की विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र: 200 समुद्री मील
  • भारत की सबसे लंबी नदी: गंगा
  • भारत की सबसे बड़ी झील: चिल्का झील
  • भारत का सबसे ऊँचा बिंदु: माउंट के-2 (8611 मीटर)
  • हिमालय का भारत में सबसे ऊँचा बिंदु: कंचनजंगा (8598 मीटर)
  • भारत का सबसे निचला बिंदु: कुट्टनाड (-2.2 मीटर)
  • भारत का सबसे उत्तरी बिंदु: सियाचिन
काराकोरम के निकट हिमनद:
  • भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु इंदिरा पॉइंट है, जो अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के ग्रेट निकोबार द्वीप में स्थित है।
  • भारत का सबसे पश्चिमी बिंदु गुजरात राज्य में घुर मोता के पश्चिम में स्थित है।
  • भारत का सबसे पूर्वी बिंदु किबिथु है, जो अरुणाचल प्रदेश राज्य में स्थित है।
  • भारत का सबसे ऊँचा बिंदु कंचनजंगा है, जो सिक्किम राज्य में स्थित है।
  • भारत का सबसे निचला बिंदु कुट्टनाड है, जो केरल राज्य में स्थित है।
सीमाएँ:
  • उत्तर में, भारत को तिब्बत से हिमालय पर्वत श्रृंखला द्वारा अलग किया गया है। भारत चीन (सीमा लंबाई: 4057 किलोमीटर), भूटान (सीमा लंबाई: 699 किलोमीटर), और नेपाल (सीमा लंबाई: 1751 किलोमीटर) के साथ सीमा साझा करता है।
  • सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जो भूटान, नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं के बीच स्थित है, मुख्य भूमि भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है।
  • भारत और चीन के बीच की सीमा रेखा को मैकमोहन रेखा के रूप में जाना जाता है।
  • भाररत की अक्षांशीय और देशांतरीय सीमा डिग्री में लगभग समान है, दोनों लगभग 30 डिग्री हैं। हालांकि, किलोमीटर के मामले में उत्तर-दक्षिण दूरी (लगभग 3200 किलोमीटर) पूर्व-पश्चिम दूरी से अधिक है।
  • पूर्व में, भारत चिन हिल्स और काचिन हिल्स के साथ सीमा साझा करता है।
भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं:

उत्तर-पूर्व:

  • भारत उत्तर-पूर्व में म्यांमार (जिसे बर्मा भी कहा जाता है) के साथ सीमा साझा करता है। यह सीना घने जंगलों वाले पहाड़ों द्वारा चिह्नित है।

पूर्व:

  • बांग्लादेश को भारत से इंडो-गंगेटिक मैदान के जल विभाजन क्षेत्र, खासी हिल्स और मिजो हिल्स द्वारा अलग किया गया है। भारत और बांग्लादेश के बीच की सीमा 4,096 किलोमीटर लंबी है।

पश्चिम:

  • पाकिस्तान पंजाब के मैदान और थार मरुस्थल पर स्थित है। भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमा 3,323 किलोमीटर लंबी है।
  • अफगानistan उत्तर-पश्चिम में स्थित है। भारत और अफगानistan के बीच की सीमा 106 किलोमीटर लंबी है।
  • पाकिस्तान पंजाब के मैदान और थार मरुस्थल पर स्थित है। भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमा 3,323 किलोमीटर लंबी है।
  • अफगानistan उत्तर-पश्चिम में स्थित है। भारत और अफगानistan के बीच की सीमा 106 किलोमीटर लंबी है।

दक्षिण:

  • भारत दक्षिण में हिंद महासागर से घिरा हुआ है।
  • श्रीलंका भारत से मन्नार की खाड़ी और पालक जलडमरूमध्य द्वारा अलग है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करने वाले राज्य:
  • अफगानistan: जम्मू और कश्मीर (पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र)
  • बांग्लादेश: पश्चिम बंगाल, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा, असम
  • भूटान: पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम
  • चीन: जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश
  • नेपाल: बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, सिक्किम, पश्चिम बंगाल
  • म्यांमार: अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड
  • पाकिस्तान: राजस्थान, गुजरात, जम्मू और कश्मीर, पंजाब
भारत की भौतिक विशेषताएं:
  • भारत को तीन मुख्य भागों में बांटा जा सकता है:

    1. हिमालय और उसके आसपास के पहाड़
    2. इंडो-गंगेटिक मैदान
    3. प्रायद्वीपीय भारत
  • एक चौथा भाग भी है, तटीय मैदान, जो प्रायद्वीप को घेरे हुए हैं।

  • हिमालय दुनिया के सबसे नए वलित पहाड़ हैं। ये भारत को उत्तर, उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व में घेरे हुए हैं।

  • हिमालय और उसके आस-पास के पर्वत बहुत पुराने चट्टानों से बने हैं जो समुद्र के नीचे बने थे।

  • हिमालय के दक्षिण में इंडो-गंगा के मैदान स्थित हैं। ये मिट्टी से बने हैं जो हिमालय से नदियों द्वारा लाई गई थी।

  • प्रायद्वीपीय भारत भारत का सबसे पुराना भाग है। यह बहुत कठोर चट्टानों से बना है।

  • तटीय मैदान प्रायद्वीपीय भारत को घेरे हुए हैं। ये रेत और मिट्टी से बने हैं जो पहाड़ों से नदियों द्वारा लाई गई थी।

हिमालय और काराकोरम पर्वत

हिमालय और काराकोरम पर्वत विश्व के सबसे प्रभावशाली पर्वत श्रृंखलाओं में से दो हैं। ये एशिया में स्थित हैं और भारत की उत्तरी सीमा के साथ फैले हैं।

काराकोरम पर्वतों में कई श्रृंखलाएं हैं, जिनमें जास्कर, लद्दाख और पीरपंजाल श्रृंखलाएं शामिल हैं। झेलम नदी इस क्षेत्र से बहती है।

हिमालय की तीन मुख्य श्रृंखलाएं हैं: हिमाद्रि, हिमाचल और शिवालिक श्रृंखलाएं। ये लगभग 2400 किलोमीटर लंबे हैं और चौड़ाई में 240 से 320 किलोमीटर तक भिन्न हैं।

महान हिमालय, या उत्तरी श्रृंखला, हिमालय का सबसे ऊंचा भाग है। इसमें विश्व की तीन सबसे ऊंची पर्वत चोटियाँ हैं: माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर), के-2 या माउंट गॉडविन ऑस्टिन (8611 मीटर), और कंचनजंगा (8598 मीटर)।

इन ऊंचाइयों के कारण हिमालय से यात्रा करना कठिन होता है। केवल कुछ दर्रे हैं जो लोगों को पर्वतों को पार करने की अनुमति देते हैं। कुछ सबसे प्रसिद्ध दर्रे शिपकिला, जेलप ला और नाथू ला हैं।

हिमालय

हिमालय एशिया में एक पर्वत श्रृंखला है। ये दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत हैं। हिमालय को तीन भागों में बांटा गया है: महान हिमालय, लघु हिमालय, और बाहरी हिमालय।

महान हिमालय

महान हिमालय हिमालय का सबसे ऊंचा भाग है। ये साल भर बर्फ से ढके रहते हैं। महान हिमालय में कई ग्लेशियर हैं, जो गंगा और यमुना जैसी नदियों के स्रोत हैं। महान हिमालय का मूल भाग ग्रेनाइट से बना है।

लघु हिमालय

लघु हिमालय महान हिमालय के दक्षिण में स्थित हैं। ये महान हिमालय जितने ऊंचे नहीं हैं, फिर भी काफी ऊंचे हैं। लघु हिमालय में कई घाटियाँ हैं, जिनमें प्रसिद्ध कश्मीर घाटी शामिल है। लघु हिमालय में कई स्वास्थ्य रिसॉर्ट्स भी हैं।

बाहरी हिमालय

बाहरी हिमालय हिमालय का सबसे निचला भाग है। यह छोटे हिमालय और इंडो-गंगा मैदानों के बीच स्थित है। बाहरी हिमालय अत्यधिक संकुचित और परिवर्तित चट्टानों से बना है। सुदूर पूर्व में छोटे हिमालय लगातार श्रेणियों द्वारा जुड़े हुए हैं। छोटे हिमालय और शिवालिकों के बीच की अनुदिश घाटी को ‘दून’ कहा जाता है। देहरा दून, कोटली दून और पटली दून कुछ प्रसिद्ध दून हैं। ये श्रेणियाँ ढीले तलछटी पदार्थों से बनी हैं जो उत्तर में मुख्य हिमालयी श्रेणियों से नदियों द्वारा नीचे लाए गए हैं। इन घाटियों में मोटी कंकड़ और जलोढ़ मिट्टी की परतें हैं। उत्तरी मैदान या इंडो-गंगा मैदान गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों की घाटियों द्वारा बने हैं। ये लगभग 2400 किमी लंबे और 240-320 किमी चौड़े हैं। ये मैदान भारत के एक-तिहाई भूभाग को घेरते हैं और सबसे उपजाऊ क्षेत्र हैं। भू-आकृति लक्षणों के आधार पर इस मैदान के दो भाग हैं। इंडो-गंगा क्षेत्र एक बहुत ही नवीन भू-आकृति है जो केवल चतुर्थकाल में बनी है। इसमें बहुत कम ऊंचाई है और यह मुख्यतः लहरदार मैदानों से बना है जो अच्छी तरह विकसित नदियों द्वारा काटे गए हैं।

नदी तंत्र
  • नदी प्रणाली की सतह मध्य से उत्तरार्द्ध प्लीस्टोसीन और होलोसीन या हाल के युग के अवसादों से ढकी है।
  • पश्चिम में इसमें थार मरुस्थल का विशाल विस्तार सम्मिलित है।
  • बाढ़ स्तर से ऊपर के उच्चभूमि मैदान जलोढ़ मिट्टी से बने हैं। यह विश्व के सबसे उपजाऊ क्षेत्रों में से एक है।
  • निम्न भूमि बाढ़ के समय जलमग्न होने की संभावना रखती है।
  • महान मैदान उत्तर की महान पहाड़ियों के दक्षिण में समतल भूमि हैं जो उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी से बनी हैं।
  • महान मैदान पूर्व, उत्तर और पश्चिम में उत्तरी पहाड़ियों तथा दक्षिण में प्रायद्वीपीय पठार से घिरे हैं।
  • असम के मैदान में ब्रह्मपुत्र घाटी सम्मिलित है; पूर्वी मैदान बंगाल बेसिन और बिहार को कवर करते हैं; उत्तरी मैदान उत्तर प्रदेश-पंजाब के दोआबों में फैले हैं और सिंधु मैदान महान नदी से सिंचित पंजाब और सिंध के क्षेत्रों को कवर करते हैं।
  • इस प्रकार इसमें सिंधु बेसिन, गंगा बेसिन और ब्रह्मपुत्र बेसिन सम्मिलित हैं। सिंधु नदी और इसकी सहायक नदियाँ—झेलम, चिनाब, रवि, ब्यास और सतलुज—सिंधु बेसिन बनाती हैं।

गंगा नदी की सहायक नदियाँ:

  • गंगा नदी की कुछ सहायक नदियाँ हिमालय से उद्गमित होती हैं, जबकि अन्य प्रायद्वीपीय पठार से।
  • हिमालयन सहायक नदियों में यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी और तिस्ता नदियाँ सम्मिलित हैं।
  • प्रायद्वीपीय पठार की सहायक नदियों में चंबल, सिंध, बेतवा, सोन, केन और दामोदर नदियाँ सम्मिलित हैं।

ब्रह्मपुत्र नदी:

  • ब्रह्मपुत्र नदी हिमालय से परे उद्गमित होती है।
दक्कन पठार:
  • दक्कन का पठार उत्तर के मैदानों के दक्षिण में स्थित है।
  • इसकी सीमा पूर्वी और पश्चिमी घाट पर्वत श्रृंखलाओं से लगती है।
  • दक्कन का पठार प्रीकैम्ब्रियन चट्टानों से बना है, जो पृथ्वी की सबसे पुरानी चट्टानों में से हैं।
  • दक्कन पठार की सबसे ऊँची चोटियाँ नीलगिरि पहाड़ियाँ हैं, जो 2,500 मीटर से अधिक ऊँचाई तक पहुँचती हैं।
  • दक्कन पठार की स्थलाकृति दुर्गम है, लेकिन हिमालय जितनी दुर्गम नहीं है।
  • दक्कन पठार की अधिकांश पहाड़ियाँ टेक्टोनिक गतिविधियों के बजाय कटाव द्वारा बनी हैं।

4. तटीय मैदान:

  • पश्चिमी तटीय मैदान को दो भागों में बाँटा गया है: उत्तर में कोंकण और दक्षिण में मालाबार तट।
  • पूर्वी तटीय पट्टी को कोरोमंडल तट कहा जाता है।

प्रायद्वीपीय भारत का महान पठार:

  • प्रायद्वीपीय भारत का विशाल पठार महान मैदानों के दक्षिण में स्थित है। यह कठोर आग्नेय चट्टानों से बना है।
  • पठार के दो भाग हैं:
    • उत्तर में मालवा पठार उत्तर की ओर ढलान है।
    • दक्षिण में दक्कन पठार है।

महान भारतीय रेगिस्तान:

  • मालवा पठार के उत्तर-पश्चिम में महान भारतीय रेगिस्तान स्थित है। यह चट्टानों और रेत से बना अंतर्देशीय क्षेत्र है।

दक्कन पठार:

  • दक्कन पठार नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित है। यह पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट से घिरा हुआ है।
  • पश्चिमी घाट पुरानी पहाड़ियाँ हैं जो चार प्रमुख पहाड़ियों से बनी हैं और अरब सागर के तट के समानांतर फैली हैं।
  • पूर्वी घाट निम्न और असंतत हैं। ये बंगाल की खाड़ी के तट के पास हैं।
  • कई नदियाँ इस पठार से बहती हैं, या तो अरब सागर की ओर या बंगाल की खाड़ी की ओर।

तटीय मैदान

  • पश्चिमी तटीय मैदान संकीर्ण हैं और इन्हें कोंकण तट और मालाबार तट में विभाजित किया गया है। इनमें नदीमुख और झीलें हैं।
  • पूर्वी तटीय मैदान अधिक चौड़े हैं और इन्हें उत्तरी सरकार और कोरोमंडल तट में विभाजित किया गया है। इनमें उपजाऊ डेल्टे हैं।
अरावली और दक्कन पहाड़ियाँ
  1. अरावली:

    • भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला।
    • सबसे ऊँची चोटी: गुरु शिखर माउंट आबू पर, 1722 मीटर ऊँची।
    • गुजरात की सीमा के पास स्थित है।
  2. विंध्य:

    • दक्षिण भारत को उत्तर भारत से अलग करते हैं।
    • 1050 किलोमीटर तक फैले हैं।
    • औसत ऊँचाई: 3000 मीटर।
  3. सतपुड़ा:

    • नर्मदा और ताप्ती नदियों के बीच स्थित हैं।
    • 900 किलोमीटर तक फैले हैं।
    • कई चोटियाँ 1000 मीटर से ऊपर उठती हैं।
    • उत्तर में विंध्य श्रृंखला के समानांतर चलते हैं।
    • ये दो पूर्व-पश्चिम श्रृंखलाएँ नदी के उत्तर में इंडो-गंगा के मैदान को दक्कन पठार से अलग करती हैं।

नर्मदा नदी:

  • नर्मदा नदी भारत की एक प्रमुख नदी है।
  • यह मध्य प्रदेश और गुजरात राज्यों से होकर बहती है।
  • यह भारत की पाँचवीं सबसे लंबी नदी है।
  • हिंदू इसे एक पवित्र नदी मानते हैं।

पश्चिमी घाट:

  • पश्चिमी घाट भारत में एक पर्वत श्रृंखला है।
  • यह भारत के दक्कन पठार के पश्चिमी किनारे के साथ फैली हुई है।
  • यह दक्कन पठार को अरब सागर के किनारे संकटी तटीय मैदान से अलग करती है।
  • यह श्रृंखला लगभग 1600 किलोमीटर तक फैली है।
  • पश्चिमी घाट की औसत ऊँचाई लगभग 915-1220 मीटर है।

पूर्वी घाट:

  • पूर्वी घाट भारत में एक पर्वत श्रृंखला है।
  • ये पश्चिमी घाट जितने ऊँचे नहीं हैं।
  • पूर्वी घाट की कुछ चोटियाँ 1000 मीटर से अधिक ऊँची हैं।
  • पूर्वी घाट की औसत ऊँचाई लगभग 610 मीटर है।
  • तमिलनाडु की नीलगिरि पहाड़ियाँ पूर्वी और पश्चिमी घाट के संगम पर स्थित हैं।

द्वीप:

  • भारत में द्वीपों के दो समूह हैं:
    • अंडमान और निकोबार समूह:
      • अंडमान और निकोबार समूह बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीपों का एक समूह है।
      • उत्तरी समूह के 204 छोटे द्वीप अंडमान हैं।
      • दक्षिणी समूह के 19 छोटे द्वीप निकोबार हैं।
    • लक्षद्वीप:
      • लक्षद्वीप अरब सागर में स्थित 27 प्रवाल द्वीपों का एक समूह है।
      • ये केरल से लगभग 300 किलोमीटर पश्चिम में स्थित हैं।
      • लक्षद्वीप समूह पूरी तरह से प्रवाल से बना है।

रेगिस्तान

  • थर मरुस्थल, जिसे ग्रेट इंडियन डेज़र्ट भी कहा जाता है, भारत और पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित एक विशाल, शुष्क क्षेत्र है। यह दोनों देशों के बीच एक प्राकृतिक सीमा बनाता है।
  • थर मरुस्थल सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों की उपजाऊ मैदानों से बहुत अलग है। इस कारण, इसे एक अलग भौगोलिक क्षेत्र माना जाता है।
  • थर मरुस्थल सतलुज नदी से शुरू होता है और सिंधु नदी पर समाप्त होता है। मरुस्थल के दक्षिण-पूर्व में अरावली पर्वत हैं, और दक्षिण में कच्छ का रण, एक नमकीन दलदल, स्थित है।
  • थर मरुस्थल का अधिकांश भाग भारतीय राजस्थान राज्य में है। यह हरियाणा और पंजाब के दक्षिणी भागों तथा गुजरात के उत्तरी भाग को भी छूता है। पाकिस्तान का चोलिस्तान मरुस्थल थर मरुस्थल के बगल में है।
भारत में मिट्टियाँ
  1. जलोढ़ मिट्टी:
  • जलोढ़ मिट्टी भारत के लगभग एक-चौथाई हिस्से को घेरने वाले इंडो-गंगेटिक मैदान में पाई जाती है।
  • यह मिट्टी बहुत उपजाऊ होती है और विभिन्न फसलों की खेती के लिए उपयोग की जाती है।

भारत में मिट्टी के प्रकार

  1. जलोढ़ मिट्टी: यह मिट्टी भारत के उत्तरी मैदानों में पाई जाती है और नदियों द्वारा लाए गए तलछट के जमाव से बनती है। यह उपजाऊ है और विभिन्न फसलों की खेती के लिए उपयुक्त है।

  2. काली मिट्टी: यह मिट्टी दक्कन पठार में पाई जाती है और ज्वालामुखीय चट्टानों के अपक्षय से बनती है। यह खनिजों से भरपूर है और कपास की खेती के लिए उपयुक्त है।

  3. लाल मिट्टी: यह मिट्टी भारत के दक्षिणी और पूर्वी भागों में पाई जाती है और क्रिस्टलीय चट्टानों के अपक्षय से बनती है। यह जलोढ़ मिट्टी की तुलना में कम उपजाऊ होती है, लेकिन दालों और मोटे अनाज की खेती के लिए उपयुक्त है।

  4. लैटराइट मिट्टी: यह मिट्टी भारत के तटीय क्षेत्रों में पाई जाती है और लैटराइट चट्टानों के अपक्षय से बनती है। यह अम्लीय और कम उपजाऊ होती है, लेकिन काजू और नारियल जैनी फसलों की खेती के लिए उपयोग की जा सकती है।

भारत में पाई जाने वाली अन्य प्रकार की मिट्टियाँ हैं:
  • लवणीय और क्षारीय मिट्टियाँ
  • पीट और दलदली मिट्टियाँ
  • शुष्क या रेगिस्तानी मिट्टियाँ
  • वन मिट्टी
भारत की नदी प्रणालियाँ

भारत में कई प्रमुख नदी प्रणालियाँ हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था और संस्कृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रमुख नदी प्रणालियाँ हैं:

  • गंगा नदी प्रणाली
  • सिंधु नदी प्रणाली
  • ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली
  • गोदावरी नदी प्रणाली
  • कृष्णा नदी प्रणाली
  • महानदी नदी प्रणाली
  • नर्मदा नदी प्रणाली
  • ताप्ती नदी प्रणाली भारत की नदियों को विभिन्न समूहों में बाँटा गया है।
  1. हिमालयी प्रणाली: ये नदियाँ हिमालय से निकलती हैं और हिमपात से पोषित होती हैं। वर्षा ऋतु के दौरान ये बाढ़ लाती हैं और अधिकांश जल को समुद्र में ले जाती हैं। तीन प्रमुख हिमालयी नदियाँ सिंधु, सतलुज और ब्यास हैं।

तालिका 3.1 हिमालयी नदी प्रणाली के बारे में जानकारी दिखाती है।

नाम स्रोत लंबाई किसमें मिलती है
सिंधु नदी प्रणाली तिब्बत में माउंट कैलाश
(मानसरोवर झील के पास)
$2900 \mathrm{~km}$ अरब सागर
सतलुज मानसरोवर राकस झीलें $1050 \mathrm{~km}$ चिनाब
व्यास रोहतांग दर्रे के पास $470 \mathrm{~km}$ सतलुज
रवि रोहतांग दर्रे के पास $720 \mathrm{~km}$ चिनाब
चिनाब हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिलों के पास $960 \mathrm{~km}$ सिंधु
हिमाचल प्रदेश के $725 \mathrm{~km}$ चिनाब

(जारी)

*पवित्र गंगा सबसे लंबी है

भारत की नदियाँ

भारत में कई नदियाँ हैं। भारत की सबसे लंबी नदी ब्रह्मपुत्र है, जिसकी लंबाई 2900 किलोमीटर है। लेकिन इस नदी का केवल एक-तिहाई हिस्सा भारत से होकर बहता है।

डेकन प्रणाली वर्षा पर निर्भर नदियों का एक समूह है। ये भारतीय नदियों में बहने वाले कुल जल का लगभग 30% ले जाती हैं। गोदावरी इस प्रणाली की सबसे बड़ी नदी है। कावेरी भारत की सबसे दक्षिणी नदी है।

तटीय नदी प्रणाली समुद्र में मिलने वाली छोटी नदियों का एक समूह है। पश्चिम तट पर इनमें से 600 से अधिक नदियाँ हैं, लेकिन पूर्वी तट पर इनमें से केवल कुछ ही डेल्टा के पास समुद्र में मिलती हैं।

तीसरी नदी प्रणाली

तीसरी नदी प्रणाली में गोदावरी, कृष्णा, कावेरी और पेनार नदियाँ शामिल हैं। गोदावरी इस प्रणाली की सबसे बड़ी नदी है और यह बंगाल की खाड़ी में मिलने से पहले 1450 किलोमीटर तक बहती है। कृष्णा इस प्रणाली की दूसरी सबसे लंबी नदी है और यह 1290 किलोमीटर तक बहती है। कावेरी इस प्रणाली की तीसरी सबसे लंबी नदी है और यह 760 किलोमीटर तक बहती है। पेनार इस प्रणाली की चौथी सबसे लंबी नदी है और यह 560 किलोमीटर तक बहती है।

दक्कन पठार की नदियाँ

नदी स्रोत लंबाई (किमी) मुहाना
दामोदर छोटा नागपुर पठार 592 बंगाल की खाड़ी
नर्मदा अमरकंटक पठार 1290 अरब सागर
ताप्ती बेतूल पठार 724 अरब सागर
शरावती पश्चिम घाट 124 अरब सागर
नेतरावती पश्चिम घाट - -
भरतपुज़ा पश्चिम घाट 250 -
पेरियार पश्चिम घाट 300 -
पम्बा पश्चिम घाट 176 -

अंतर्देशीय जल निकासी बेसिन की नदियाँ

ये राजस्थान के रेतीले क्षेत्रों में स्थित छोटी नदियाँ हैं जिन्हें ‘अंतर्देशीय जल निकासी बेसिन की नदियाँ’ कहा जाता है। इनका समुद्र में कोई आउटलेट नहीं होता, सिवाय लूनी नदी के, जो कच्छ के रण में गिरती है। इस श्रेणी में अन्य प्रमुख नदियाँ मच्छु, रूपेन, सरस्वती, बनास और घग्घर हैं।

झीलें

प्रदान की गई मानचित्र केवल एक रूपरेखा है, पैमाने पर आधारित नहीं है। यह संदर्भ के लिए और अवधारणा की समझ में सहायता के लिए प्रस्तुत किया गया है।

हिमालय में कई झीलें हैं।

  • अधिकांत झीलें समुद्र तल से 5000 मीटर से कम ऊँचाई पर हैं। जितनी अधिक ऊँचाई होती है, झीलें उतनी ही छोटी होती हैं।
  • सबसे बड़ी झील पांगोंग त्सो है। यह भारत और तिब्बत की सीमा पर स्थित है। यह समुद्र तल से 4600 मीटर ऊपर है, 8 किलोमीटर चौड़ी और 134 किलोमीटर लंबी है।
  • सबसे ऊँची झील उत्तरी सिक्किम की गुरुडोंगमर है। यह समुद्र तल से 5370 मीटर ऊपर है।
भारत में विभिन्न प्रकार की झीलें हैं:
  • टेक्टोनिक झीलें: ये कश्मीर और कुमाऊँ हिमालय में प्लीस्टोसीन युग की प्राचीन झीलें हैं।
  • क्रेटर झीलें: ये ज्वालामुखियों द्वारा बनी हैं।
  • हिमनद झीलें: ये बड़े पहाड़ों में पाई जाती हैं।
  • एल्यूवियल झीलें: ये गंगा के मैदानों में आक्सबो झीलें हैं।
  • ऐओलियन झीलें: ये छोटे गड्ढों या खोखले स्थानों द्वारा बनी हैं।
  • लैगून: ये समुद्र तट के साथ रेत की बाधाओं द्वारा बनते हैं।

भारत की कुछ लैगून उदाहरण हैं:

  • ओडिशा में चिल्का झील
  • आंध्र प्रदेश में पुलिकट झील
  • केरल के मालाबार तट पर कई कायल

भारत की महत्वपूर्ण झीलें

  • कश्मीर की झीलें: डल, वुलर, शेषनाग, वेरिनाग, मनासबल, नागिन आदि।
  • कुमाऊँ की झीलें: नैनीताल, भीमताल, खुर्पताल, सातताल, पुनाताल आदि।
  • राजस्थान की झीलें: उदयसागर, फतहसागर, जय समंद, पिचोला और सांभर नमक झीलें।
  • अन्य महत्वपूर्ण झीलें: महाराष्ट्र में लोनार झील, ओडिशा में चिल्का, कोल्लेरू झील (आंध्र प्रदेश) और नक्कीताल (माउंट आबू)।

सबसे बड़ा जिला:

  • कच्छ (गुजरात) 45,652 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ

सबसे छोटा ज़िला:

  • महे (पुदुचेरी) 9 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ

कर्क रेखा:

  • आठ राज्यों से होकर गुजरती है: मिज़ोरम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात

भारतीय मानक मध्याह्न रेखा:

  • पाँच राज्यों से होकर गुजरती है: आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश
जलवायु और वन संसाधन

भारतीय मौसम विभाग चार मौसमों को मान्यता देता है:

  • सर्दी (दिसंबर-मार्च)
  • गर्मी (अप्रैल-मई)
  • मानसून (जून-सितंबर)
  • दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का मौसम (अक्टूबर-नवंबर)

भारत की जलवायु दो वर्षा लाने वाली हवाओं से प्रभावित होती है:

  1. दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून-सितंबर): ये मानसून भारत में कुल वर्षा का 86% लाते हैं। ये जून की शुरुआत में पश्चिमी तट पर शुरू होते हैं और सितंबर तक चलते हैं, अंतरतक जाने पर वर्षा घटती जाती है।
  2. उत्तर-पूर्व मानसून (नवंबर-दिसंबर): इन्हें शीतकालीन मानसून भी कहा जाता है और ये छोटे क्षेत्र तक सीमित होते हैं, विशेषकर पूर्वी तट। यह तमिलनाडु का प्राथमिक मानसून है।

अधिक वर्षा वाले क्षेत्र (200 सेमी से ऊपर)

  • असम, अरुणाचल, मेघालय, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग
  • पश्चिमी घाट
  • हिमालय की ढलानें

कम वर्षा वाले क्षेत्र (50 सेमी से कम):

  • कच्छ और पश्चिमी राजस्थान
  • दक्षिणी हरियाणा, दक्षिण-पूर्वी पंजाब और लद्दाख
2011 के वन सर्वेक्षण के अनुसार भारत में वन आवरण:
  • मध्य प्रदेश में सबसे बड़ा वन क्षेत्र है (11.25%), इसके बाद अरुणाचल प्रदेश (9.75%), छत्तीसगढ़ (8.09%), महाराष्ट्र (7.33%), और ओडिशा (7.07%) है।
  • पूर्वोत्तर राज्य, जो भारत के भू-क्षेत्र का केवल 7.76% हिस्सा हैं, देश के कुल वन क्षेत्र का लगभग 25% हिस्सा रखते हैं।
  • पूर्वोत्तर राज्यों में, वन भूमि का लगभग 66.81% हिस्सा कवर करते हैं, जो राष्ट्रीय औसत 21.02% से कहीं अधिक है।
  • 2005 से, पूर्वोत्तर राज्यों ने 598 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र प्राप्त किया है।
  • पहली बार, विभिन्न ऊंचाई क्षेत्रों में वन क्षेत्र का आकलन किया गया है।
  • समुद्र तल से 1000 और 2000 मीटर के बीच के क्षेत्रों में सबसे अधिक वन क्षेत्र है (72.19%)।
  • भारत के वन क्षेत्र का आधे से अधिक हिस्सा समुद्र तल से 1 और 500 मीटर के बीच के क्षेत्रों में पाया जाता है।
  • पहली बार, हमारे पास भारत में विभिन्न प्रकार के वनों में वन क्षेत्र के बारे में जानकारी है।
  • भारत के लगभग एक-तिहाई वन उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती हैं, जबकि उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन 30.16% बनाते हैं।
  • उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वन भारत के भूमि का 8.75% हिस्सा कवर करते हैं।
  • पश्चिम बंगाल में भारत के लगभग आधे मैंग्रोव वन हैं।
  • भारत का मैंग्रोव क्षेत्र 58 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है।
  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मैंग्रोव क्षेत्र में कमी सुनामी के कारण हुई है।
  • महाराष्ट्र में भारत का सबसे बड़ा वृक्ष क्षेत्र है (9466 वर्ग किलोमीटर), इसके बाद गुजरात (8390 वर्ग किलोमीटर), राजस्थान (8274 वर्ग किलोमीटर), और उत्तर प्रदेश (7381 वर्ग किलोमीटर) है।
  • हिमालय क्षेत्र में जहां नदियां शुरू होती हैं, वहां बहुत अधिक वनों की कटाई हो रही है।
  • हमें अपना पर्यावरण स्वस्थ रखने के लिए अपनी प्राकृतिक वनस्पति की रक्षा करनी होगी। हमारे वनों की रक्षा करने के लिए, हमें कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे।
  1. हमें लोगों को यह सोचे बिना पेड़ों की कटाई करने से रोकना होगा कि इसके क्या परिणाम होंगे।
  2. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जंगलों में जानवर घास और पौधों को अत्यधिक न खाएं।
  3. हमें सावधान रहना होगा कि जंगलों में आग न लगे।
  4. हमें “झूमिंग” कहलाने वाली खेती को रोकना होगा, जिसमें लोग खेती के लिए जमीन साफ करने के लिए जंगलों को जलाते हैं।
  5. हमें अपने शहरों और कस्बों के उपयोग की योजना बनानी होगी ताकि वे अत्यधिक वन भूमि पर कब्जा न करें।
  6. हमें लोगों को वाणिज्यिक उद्देश्यों से पेड़ लगाने और वनों की देखभाल में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।

2011 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल वन आच्छादन 6,92,027 वर्ग किलोमीटर है, जो देश के कुल भू-क्षेत्र का लगभग 21% है। इसमें से 83,471 वर्ग किलोमीटर अत्यध घने वन हैं, 32,073 वर्ग किलोमीटर मध्यम घने वन हैं, और शेष खुले वन हैं।

  • भारत का वन क्षेत्र लगभग 6,92,027 वर्ग किलोमीटर है, जो देश के कुल भू क्षेत्र का 21.05% है।
  • भारत में वृक्ष आवरण लगभग 90,844 वर्ग किलोमीटर अनुमानित है, जो कुल भू क्षेत्र का 2.76% है। वृक्ष आवरण में 1 हेक्टेयर से छोटे और 10% से अधिक कैनोपी घनत्व वाले वृक्ष समूह शामिल हैं।
  • 1988 की राष्ट्रीय वन नीति ने भारत में वन आवरण को लगभग 33.3% तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • 2009 की पिछली मूल्यांकन रिपोर्ट की तुलना में देश में वन आवरण में 367 वर्ग किलोमीटर की शुद्ध कमी आई है। हालांकि, मूल्यांकन विधियों में बदलाव को ध्यान में रखने पर 2009 की तुलना में वास्तव में वन आवरण में 1128 वर्ग किलोमीटर की शुद्ध वृद्धि हुई है।
  • अरुणाचल प्रदेश का सघन वन आवरण उसके भौगोलिक क्षेत्र का सबसे अधिक अनुपात है, जो 20,868 वर्ग किलोमीटर है।
  • हरियाणा में वन आवरण का क्षेत्र सबसे कम है, केवल 1068 वर्ग किलोमीटर।
सबसे बड़ा वन आवरण:
  • मध्य प्रदेश का वन आवरण क्षेत्र सबसे बड़ा है, जो 77,700 वर्ग किलोमीटर है।

वन आवरण का सबसे उच्च प्रतिशत:

  • मिज़ोरम का वन आवरण उसके कुल भौगोलिक क्षेत्र की तुलना में सबसे अधिक प्रतिशत है। इसकी 90.68% भूमि वनों से ढकी हुई है।

पहाड़ी ज़िलों में वन आवरण:

  • भारत में 124 पहाड़ी जिले हैं और उनके कुल क्षेत्रफल का 39.74% भाग वनों से ढका है।
  • हालांकि, इन पहाड़ी जिलों में वन आच्छादन 548 वर्ग किलोमीटर घटा है।
  • अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा और उत्तराखंड राज्यों के सभी जिलों को पहाड़ी जिले माना जाता है।
  • इन नौ राज्यों के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 63.07% भाग वनों से ढका है।

आदिवासी जिलों में वन आच्छादन:

  • भारत में 188 आदिवासी जिले हैं और उनके कुल क्षेत्रफल का 37.25% भाग वनों से ढका है।
  • दुर्भाग्य से, इन आदिवासी जिलों में भी वन आच्छादन 679 वर्ग किलोमीटर घटा है।
प्राकृतिक वनस्पति में परिवर्तन:
  • जैसे-जैसे पहाड़ों पर ऊंचाई बढ़ती है, तापमान गिरता है और प्राकृतिक वनस्पति का प्रकार तदनुसार बदलता जाता है। हिमालय में हम विभिन्न ऊंचाइयों पर विभिन्न प्रकार की वनस्पति पा सकते हैं। समुद्र तल से 500 मीटर तक ऊंचाई पर हम उष्णकटिबंधीय वनस्पति पाते हैं। 500 से 1500 मीटर तक उप-उष्णकटिबंधीय वनस्पति मिलती है। 2500 से 3500 मीटर तक समशीतोष्ण वनस्पति मिलती है। 3500 मीटर से ऊपर शीत मरुस्थल वनस्पति मिलती है।

दक्षिण भारत में वनस्पति प्रकार का परिवर्तन अधिक ऊंचाई पर होता है क्योंकि यह भूमध्य रेखा के निकट है और इसकी जलवायु उष्णकटिबंधीय है।

भारत में वनों के प्रकार

1. सदाबहार वन (उष्णकटिबंधीय): ये वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वार्षिक वर्षा 200 से 300 सेंटीमीटर के बीच होती है। ये पश्चिमी घाट और उप-हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इन वनों में शंकुधारी वृक्ष होते हैं, जिनकी सुई जैसी पत्तियाँ होती हैं। ये टीक, रोसवुड, महोगनी, चीड़ और बांस जैसे बहुमूल्य काष्ठ प्रदान करते हैं।

2. पर्णपाती वन (मानसून वन): ये वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वार्षिक वर्षा 150 से 200 सेंटीमीटर के बीच होती है। ये दक्कन पठार के कुछ भागों में, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में फैले हुए हैं। ये वन टीक, साल और चंदन जैसे बेहतरीन काष्ठ प्रदान करते हैं।

3. शुष्क वन: ये वन राजस्थान और गुजरात के रेगिस्तानी क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इनमें कांटेदार वृक्ष और झाड़ियाँ होती हैं जो शुष्क जलवायु के अनुरूप अनुकूलित होती हैं।

4. उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन:

  • उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वार्षिक वर्षा 75-100 सेंटीमीटर के बीच होती है।
  • वृक्षों में बबूल, नीम और इमली शामिल हैं।

5. अर्ध-रेगिस्तान और रेगिस्तान वनस्पति:

  • उन क्षेत्रों में पाई जाती है जहाँ वार्षिक वर्षा 50 सेंटीमीटर से कम हो, जैसे मध्य और पश्चिमी राजस्थान।
  • पौधों में झाड़ियाँ, कांटेदार झाड़ियाँ और कैक्टस शामिल हैं।

6. पहाड़ी वन:

  • दक्षिण भारत और हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
  • काष्ठ प्रदान करते हैं।
  • प्रमुख वृक्षों में ओक, देवदार, चीड़ और चीड़ शामिल हैं।

7. ज्वारीय वन (मैंग्रोव):

  • पूर्वी तट पर गंगा, महानदी, गोदावरी जैसे नदी-डेल्टा वाले तटीय मैदानों में, जो अक्सर जलमग्न रहते हैं, वहाँ पाए जाते हैं।
  • बंगाल में गंगा-डेल्टा पर फैले वनों को ‘सुंदरबन’ कहा जाता है, जो वहाँ पाए जाने वाले सुंदरी वृक्षों के नाम पर रखा गया है।
  • भारत में मैंग्रोव आवरण 4639 किमी² है (भारत के भौगोलिक क्षेत्रफल का 0.14%) और यह 12 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में फैला है।
वन कार्बन सिंक के रूप में:
  • पिछले दो दशकों से वन वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद मिल रही है।

भारत के वन संरक्षण प्रयास

भारत के राष्ट्रीय वन कानून और नीतियाँ वनों के संरक्षण तथा टिकाऊ प्रबंधन पर केंद्रित हैं। इन प्रयासों ने वनों की कटाई को उलटने और भारत के वनों को कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के महत्वपूर्ण अवशोषक में बदलने में मदद की है।

कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन

भारत के वनों और वृक्षों द्वारा अवशोषित CO2 देश की कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का 11.25% हिस्सा ऑफसेट करने के लिए पर्याप्त है। यह आवासीय और परिवहन ऊर्जा उपयोग से होने वाले सभी CO2 उत्सर्जन को समाप्त करने के समतुल्य है या कृषि उत्सर्जन का 40% हिस्सा।

एक प्रमुख कार्बन सिंक

भारत के वन और वृक्ष कार्बन उत्सर्जन को कम करने में, भारत और विश्व दोनों के लिए, एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत में प्रवाल भित्ति क्षेत्र

भारत में लगभग 2375 वर्ग किलोमीटर प्रवाल भित्तियाँ हैं।

संरक्षण हेतु प्रवाल भित्तियाँ

चार महत्वपूर्ण प्रवाल भित्ति क्षेत्रों को विशेष देखभाल और प्रबंधन के लिए चुना गया है:

  1. मन्नार की खाड़ी
  2. कच्छ की खाड़ी
  3. लक्षद्वीप
  4. अंडमान और निकोबार

कृषि

  • भारत में लगभग 65-70% लोग खेती में काम करते हैं। देश की 50% से अधिक भूमि फसल उगाने के लिए उपयोग की जाती है।

फसल के मौसम

  • भारत में दो मुख्य फसल मौसम होते हैं:
  1. खरीफ
  2. रबी

खरीफ मौसम

  • फसलें जून या जुलाई में बोई जाती हैं और सितंबर या अक्टूबर में काटी जाती हैं।
  • खरीफ फसलों के उदाहरणों में चावल, ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का, कपास और जूट शामिल हैं।

रबी मौसम

  • फसलें अक्टूबर या दिसंबर में बोई जाती हैं और अप्रैल या मई में काटी जाती हैं।
  • रबी फसलों के उदाहरणों में गेहूं, जौ, मटर, तोरिया, सरसों और चना शामिल हैं।

मुख्य फसलें और उत्पादक

  • गेहूं मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में उगाया जाता है।
  • चावल मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में उगाया जाता है।
  • चना मुख्य रूप से मध्य प्रदेश में उगाया जाता है।
यहाँ सरल भाषा में पुनर्लिखित सामग्री है:
फसल उत्पादक राज्य
जौ महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान
बाजरा महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान
मक्का आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, बिहार
कुल मोटे अनाज कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान
कुल दालें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र
गन्ना उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु
खसखस उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश
आलू उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार
प्याज महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक
नारियल केरल, तमिलनाडु
अलसी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश
मूंगफली गुजरात, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु
तोरिया और सरसों राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश
तिल उत्तर प्रदेश, राजस्थान
सूरजमुखी महाराष्ट्र, कर्नाटक
सोयाबीन मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान
कुल तिलहन राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात
कपास गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब
जूट पश्चिम बंगाल, बिहार उड़ीसा, असम
प्रकार नाम प्रमुख उत्पादक राज्य
पौधे रेशम कर्नाटक, केरल
भांग मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश
कॉफ़ी कर्नाटक, केरल
रबड़ केरल, कर्नाटक
चाय असम, केरल
मसाले तम्बाकू गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश
काली मिर्च केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु
काजू केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश
अदरक केरल, उत्तर प्रदेश
हल्दी आंध्र प्रदेश, उड़ीसा
मिर्च महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश
लौंग केरल
केसर कर्नाटक, तमिलनाडु, जम्मू और कश्मीर

स्रोत: निदेशालय अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी, कृषि और सहकारिता विभाग।

नोट: तेलंगाना को आंध्र प्रदेश से अलग कर 29वां राज्य बनाया गया है। उपरोक्त जानकारी में आंध्र प्रदेश में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दोनों शामिल हैं।

हरित क्रांति
  • हरित क्रांति की शुरुआत 1967-68 में खेती को दो चरणों में बेहतर बनाने के लिए की गई:

प्रथम हरित क्रांति:

  • प्रथम हरित क्रांति मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर केंद्रित थी, जो पहले से ही गेहूं उत्पादन के लिए जाने जाते थे।

द्वितीय हरित क्रांति:

  • 1983-84 में हरित क्रांति का विस्तार पूर्वी और मध्य राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक किया गया।

हरित क्रांति के परिणाम:

  • हरित क्रांति के परिणामस्वरूप गेहूं का उत्पादन दोगुना से अधिक हो गया और चावल का उत्पादन 53% बढ़ गया।
डेरी फार्मिंग:
  • ऑपरेशन फ्लड I (1970-81):

    • यह कार्यक्रम विश्व बैंक के सहयोग से शुरू किया गया था।
    • इसका लक्ष्य बड़े शहरों में तरल दूध के बाजार पर नियंत्रण प्राप्त करना था।
  • ऑपरेशन फ्लड II (1981-85):

    • यह कार्यक्रम 1981 में शुरू किया गया और लगभग सभी राज्यों में विस्तारित किया गया।
  • ऑपरेशन फ्लड III (1985-90):

    • यह कार्यक्रम 1985 में सातवीं पंचवर्षीय योजना के तहत शुरू किया गया।
  • कार्यान्वयन:

    • इन कार्यक्रमों को राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (NDDB) और भारतीय डेरी निगम (IDC) द्वारा किया गया।

डेरी फार्मिंग कार्यक्रमों के परिणाम: भारत का दूध उत्पादन और अतिरिक्त

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बन गया है। परिणामस्वरूप, प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 107 ग्राम से बढ़कर 232 ग्राम हो गई है। हालांकि, इस वृद्धि के साथ अतिरिक्त दूध की समस्या भी उत्पन्न हुई है।

भारत में सिंचाई की विधियाँ
  1. कुएँ: कुएँ भारत में सिंचाई का सबसे सामान्य तरीका है, जो कुल सिंचित क्षेत्र का लगभग आधा हिस्सा है। इनका प्रयोग मुख्यतः उत्तर प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में होता है।
  2. टैंक: टैंक मध्य और दक्षिण भारत में सिंचाई के लिए प्रयोग किए जाते हैं, विशेषकर आंध्र प्रदेश में। ये कुल सिंचित क्षेत्र का लगभग 10% हैं।
  3. नहरें: नहरें पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में सिंचाई का प्राथमिक स्रोत हैं। ये कुल सिंचित क्षेत्र का लगभग 40% पानी प्रदान करती हैं।
भारत के खनिज संसाधन

भारत में खनिज संसाधनों की भरपूर मात्रा है, जिनमें लोहा, माइका, मैंगनीज़ और बॉक्साइट शामिल हैं। देश एंटीमनी, निर्माण सामग्री, सीमेंट सामग्री, मिट्टी, क्रोमाइट, चूना, डोलोमाइट और सोने में भी आत्मनिर्भर है। हालांकि, भारत में तांबा, सीसा, पारा, जस्ता, टिन, निकल, पेट्रोलियम उत्पाद, सल्फर और टंगस्टन की कमी है।

तालिका 3.6: महत्वपूर्ण खनिज
खनिज जिन राज्यों में पाया जाता है विश्व में भारत की स्थिति
लोहा उड़ीसा, बिहार, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा भारत के पास विश्व का सबसे बड़ा लौह अयस्क भंडार है, जो विश्व के ज्ञात भंडारों का लगभग एक-चौथाई है।
कोयला बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, असम भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक है।
मैंगनीज़ उड़ीसा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, झारखंड, आंध्र प्रदेश भारत मैंगनीज़ उत्पादन में विश्व में तीसरे स्थान पर है।
माइका झारखंड, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु भारत के पास विश्व का सबसे बड़ा माइका भंडार है।
बॉक्साइट (एल्युमिनियम अयस्क) झारखंड, गुजरात, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, जम्मू और कश्मीर, उड़ीसा, राजस्थान भारत बॉक्साइट उत्पादन में विश्व में तीसरे स्थान पर है।
तांबा झारखंड, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक भारत तांबा उत्पादन में विश्व में चौथे स्थान पर है।
भारत में पाए जाने वाले खनिज

टाका: मध्य प्रदेश, गुजरात में पाया जाता है।

कच्चा तेल: असम, त्रिपुरा, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, गंगा घाटी, हिमाचल प्रदेश, कच्छ, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल के तट पर, ओडिशा, महाराष्ट्र और गुजरात में पाया जाता है।

लिग्नाइट: तमिलनाडु में पाया जाता है, कुछ भंडार गुजरात, पुडुचेरी, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में भी पाए गए हैं। लिग्नाइट उत्पादन में भारत का तीसरा स्थान है।

सोना: कर्नाटक में पाया जाता है, छोटी मात्रा में आंध्र प्रदेश में भी पाया जाता है।

मैग्नेसाइट: तमिलनाडु, उत्तराखंड और कर्नाटक में पाया जाता है।

जिप्सम: राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु में पाया जाता है।

सीसा-जिंक: आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, मेघालय, तमिलनाडु, ओडिशा, सिक्किम और राजस्थान में पाया जाता है।

क्रोमाइट: ओडिशा, झारखंड, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और मणिपुर में पाया जाता है।

डोलोमाइट: मध्य प्रदेश, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और अरुणाचल प्रदेश में पाया जाता है।

हीरा: मध्य प्रदेश में पाया जाता है, आंध्र प्रदेश में अवशेष पाए गए हैं।

भारत में राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य
  • राष्ट्रीय उद्यान: भारत में लगभग 94 राष्ट्रीय उद्यान हैं। ये लगभग 33,988 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं, जो भारत के कुल भू-क्षेत्र का लगभग 1% है।
  • वन्यजीव अभयारण्य: भारत में लगभग 501 वन्यजीव अभयारण्य हैं। ये लगभग 1,07,310 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं, जो भारत के कुल भू-क्षेत्र का लगभग 3% है।
तालिका 3.7: महत्वपूर्ण अभयारण्य और उद्यान
नाम स्थान आरक्षित क्षेत्रफल
अचानकमार अभयारण्य बिलासपुर, छत्तीसगढ़ बाघ, भालू, चीतल, सांभर, गौर, लकड़बग्घा, सियार, जंगली सुअर, काला हिरण 557.35 वर्ग किलोमीटर
बांदीपुर अभयारण्य कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा हाथी, बाघ, तेंदुआ, सांभर, हिरण, पक्षी

कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान

  • स्थान: नैनीताल, उत्तरांचल
  • क्षेत्रफल: 1318.54 वर्ग किलोमीटर
  • वन्यजीव: बाघ, तेंदुए, हाथी, सांभर

दाचीगाम अभयारण्य

  • स्थान: श्रीनगर/पुलवामा, कश्मीर
  • क्षेत्रफल: 141 वर्ग किलोमीटर
  • वन्यजीव: कश्मीरी हिरण या हंगुल, हिमालयी भालू, कस्तूरी मृग, दुर्लभ हिमालयी पक्षी

गांधी सागर अभयारण्य

  • स्थान: मंदसौर और नीमच, मध्य प्रदेश
  • क्षेत्रफल: 368.62 वर्ग किलोमीटर
  • वन्यजीव: चीतल, सांभर, चिंकारा, भेड़िया हिरण, जंगली पक्षी

घना पक्षी अभयारण्य

  • स्थान: भरतपुर, राजस्थान
  • क्षेत्रफल: 29 वर्ग किलोमीटर
  • वन्यजीव: जल पक्षी, काला हिरण, चीतल, सांभर

गिर वन

  • स्थान: जूनागढ़, गुजरात
  • क्षेत्रफल: 1412.13 वर्ग किलोमीटर
  • वन्यजीव: भारत का सबसे बड़ा वन्यजीव अभयारण्य जो गिर सिंहों के लिए प्रसिद्ध है

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान

  • स्थान: जोरहाट, असम
  • क्षेत्रफल: 430 वर्ग किलोमीटर
  • वन्यजीव: गैंडा, जंगली भैंसा, हंस, हिरण, जंगली सूअर, हाथी, तेंदुआ, लंगूर, अजगर
पाखाल अभयारण्य
  • स्थान: वारंगल, आंध्र प्रदेश
  • क्षेत्रफल: 874.20 वर्ग किलोमीटर
  • वन्यजीव: बाघ, तेंदुआ, सांभर, नीलगाय, चीतल, चित्तीदार हिरण
अभयारण्य स्थान जानवर क्षेत्र
पेरियार अभयारण्य इडुक्की, केरल हाथी, बाघ, तेंदुए, गौर, नीलगाय, सांभर, नीलगिरि तहड़ 7777 किमी²
रणथंभौर टाइगर प्रोजेक्ट सवाई माधोपुर, राजस्थान बाघ, तेंदुए, स्लॉथ भालू, मगरमच्छ 400 किमी²
सरिस्का अभयारण्य अलवर, राजस्थान बाघ, तेंदुए, सांभर, नीलगाय, चीतल, चिंकारा 765 किमी²
शरावती अभयारण्य शिमोगा, कर्नाटक हाथी, बाघ, तेंदुए, सांभर, गौर, चीतल 44 किमी²
शिकारी देवी अभयारण्य मंडी, हिमाचल प्रदेश काले भालू, कस्तूरी मृग, तेंदुए, तीतर 72 किमी²
सुंदरबन टाइगर रिजर्व दक्षिण 24 परगना बाघ, हिरण, जंगली सुअर, तेंदुए 4264 किमी²
सोनाई-रुपाई अभयारण्य सोनितपुर, असम हाथी, सांभर, जंगली सुअर, एक सींग वाला गैंडा 1 किमी²
महत्वपूर्ण नगर और स्थान

तालिका 3.8: नदी के किनारे स्थित भारतीय शहर

शहर नदी राज्य
आगरा यमुना उत्तर प्रदेश
अहमदाबाद साबरमती गुजरात
इलाहाबाद गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम उत्तर प्रदेश
अलुवा पेरियार केरल
अयोध्या सरयू उत्तर प्रदेश
बद्रीनाथ गंगोत्री उत्तराखंड
भागलपुर गंगा बिहार
बक्सा तीस्ता पश्चिम बंगाल
चेन्नई कोउम तमिलनाडु
कटक महानदी ओडिशा
दिल्ली यमुना दिल्ली
गुवाहाटी ब्रह्मपुत्र असम
हरिद्वार गंगा उत्तराखंड
जबलपुर नर्मदा मध्य प्रदेश
जयपुर बनास राजस्थान
कानपुर गंगा उत्तर प्रदेश
कोलकाता हुगली पश्चिम बंगाल
लखनऊ गोमती उत्तर प्रदेश
मुंबई मिठी महाराष्ट्र
मैसूर कावेरी कर्नाटक
नागपुर नाग महाराष्ट्र
पटना गंगा बिहार
पुणे मुठा महाराष्ट्र
रायपुर महानदी छत्तीसगढ़
ऋषिकेश गंगा उत्तराखंड
सूरत तापी गुजरात
वाराणसी गंगा उत्तर प्रदेश
विजयवाड़ा कृष्णा आंध्र प्रदेश
विशाखापत्तनम गोस्थानी आंध्र प्रदेश
शहर नदी राज्य
गंगा बिहार
कोलकाता हुगली पश्चिम बंगाल
कटक महानदी उड़ीसा
दिल्ली यमुना दिल्ली
डिब्रुगढ़ ब्रह्मपुत्र असम
गुवाहाटी ब्रह्मपुत्र असम
हरिद्वार गंगा उत्तराखंड
हावड़ा हुगली पश्चिम बंगाल
हैदराबाद मुसा आंध्र प्रदेश
जमशेदपुर सुवर्णरेखा झारखंड
कानपुर गंगा उत्तर प्रदेश
कोटा चंबल राजस्थान
लेह सिंधु जम्मू और कश्मीर
लखनऊ गोमती उत्तर प्रदेश
लुधियाना सतलुज पंजाब
मथुरा यमुना उत्तर प्रदेश
मुरादाबाद राम गंगा उत्तर प्रदेश
मुंगेर गंगा उत्तर प्रदेश
नासिक गोदावरी महाराष्ट्र
पटना गंगा/सोन बिहार
श्रीनगर झेलम जम्मू और कश्मीर
सूरत ताप्ती गुजरात
तिरुचिरापल्ली कावेरी तमिलनाडु
उज्जैन शिप्रा मध्य प्रदेश
विजयवाड़ा कृष्णा आंध्र प्रदेश
वाराणसी गंगा उत्तर प्रदेश

नोट: तेलंगाना को आंध्र प्रदेश से अलग राज्य के रूप में बनाया गया है। भारत का 29वां राज्य आंध्र प्रदेश है। उपरोक्त जानकारी में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दोनों शामिल हैं।

भारतीय जनजातियाँ और उनका निवास स्थान:
जनजाति का नाम पाया जाता है
अबोर असम, अरुणाचल प्रदेश
अंगामी नागालैंड, असम
आओ नागालैंड, असम
अपतानी अरुणाचल प्रदेश
बडगा तमिलनाडु (निलगिरि पहाड़ी)
बैगा मध्य प्रदेश

रादेश, छत्तीसगढ़:

  • रादेश लोग छत्तीसगढ़ राज्य में रहते हैं।

भील:

  • भील मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र राज्यों में रहते हैं।

भोटिया:

  • भोटिया उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों में रहते हैं।

बिरहोर:

  • बिरहोर लोग झारखंड के हजारीबाग जिले में रहते हैं।

चेनचू:

  • चेनचू आंध्र प्रदेश और उड़ीसा राज्यों में रहते हैं।

गद्दी:

  • गद्दी हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर राज्यों में रहते हैं।

गैलॉन्ग:

  • गैलॉन्ग लोग उत्तर-पूर्व हिमालयी क्षेत्र में रहते हैं।

गारो:

  • गारो मेघालय राज्य में रहते हैं।

गोंड:

  • गोंड मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश राज्यों में रहते हैं।

खस:

  • खस लोग उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, नेपाल, बंगाल, सिक्किम और भूटान राज्यों में रहते हैं।

खासी:

  • खासी असम और मेघालय राज्यों में रहते हैं।

खोंड:

  • खोंड उड़ीसा और आंध्र प्रदेश राज्यों में रहते हैं।

कोल:

  • कोल लोग मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों में रहते हैं।

कोलम:

  • कोलम लोग आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों में रहते हैं।

कोटा:

  • कोटा तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में रहते हैं।

कुकी:

  • कुकी लोग मणिपुर राज्य में रहते हैं।

लाहोरा:

  • लाहोरा लोग नागालैंड और असम राज्यों में रहते हैं।

लेप्चा:

  • लेप्चा सिक्किम राज्य में रहते हैं।

लुशाई:

  • लुशाई त्रिपुरा राज्य में रहते हैं।

मीना:

  • मीना लोग राजस्थान राज्य में रहते हैं।

मिकिर:

  • मिकिर असम राज्य में रहते हैं।

मोनपा:

  • मोनपा लोग अरुणाचल प्रदेश राज्य में रहते हैं।

मुंडा:

  • मुंडा झारखंड राज्य में रहते हैं।

मुरिया:

  • मुरिया मध्य प्रदेश राज्य में रहते हैं।

कुरुख के ओराओं:

  • कुरुख के ओराओं झारखंड और उड़ीसा राज्यों में रहते हैं।

ओन्गे:

  • ओन्गे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में रहते हैं।

संथाल:

  • संथाल पश्चिम बंगाल, झारखंड और उड़ीसा राज्यों में रहते हैं।
भारत की जनजातियाँ
  • स्सा: बिहार में पाए जाते हैं।
  • सेमा: नागालैंड और असम में पाए जाते हैं।
  • सेंटिनेलीज़: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पाए जाते हैं।
  • शोमेन्स: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पाए जाते हैं।
  • तांगखुल: नागालैंड और असम में पाए जाते हैं।
  • टोडा: तमिलनाडु के नीलगिरि पहाड़ियों में पाए जाते हैं।
  • उराली: केरल में पाए जाते हैं।
  • वारली: महाराष्ट्र में पाए जाते हैं।
भारत के हिल स्टेशन
  • अल्मोड़ा: उत्तराखंड की कुमाऊँ पहाड़ियों में स्थित, समुद्र तल से 5500 फीट की ऊँचाई पर।
  • चेरापूंजी: मेघालय में शिलांग से 30 मील दक्षिण में स्थित, समुद्र तल से 4455 फीट की ऊँचाई पर।
  • कूनूर: तमिलनाडु की नीलगिरि पहाड़ियों में स्थित, समुद्र तल से 6740 फीट की ऊँचाई पर।
  • डलहौज़ी: हिमाचल प्रदेश में स्थित, समुद्र तल से 7867 फीट की ऊँचाई पर।
  • दार्जिलिंग: पश्चिम बंगाल में स्थित, समुद्र तल से 7168 फीट की ऊँचाई पर।
  • गुलमर्ग: जम्मू और कश्मीर में स्थित, समुद्र तल से 8850 फीट की ऊँचाई पर।
  • कालिम्पोंग: पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग के पास स्थित, समुद्र तल से 4000 फीट की ऊँचाई पर।
  • कसौली: हिमाचल प्रदेश में शिमला के पास स्थित, समुद्र तल से 7200 फीट की ऊँचाई पर।
  • कोडाइकैनाल: तमिलनाडु में स्थित, समुद्र तल से 7200 फीट की ऊँचाई पर।
  • कुल्लू घाटी: हिमाचल प्रदेश में स्थित, समुद्र तल से 3999 फीट की ऊँचाई पर।
  • लैंसडाउन: उत्तराखंड के गढ़वाल में स्थित, समुद्र तल से 5597 फीट की ऊँचाई पर।
  • महाबलेश्वर: महाराष्ट्र में स्थित, समुद्र तल से 4500 फीट की ऊँचाई पर।
  • माउंट आबू: राजस्थान में स्थित, समुद्र तल से 3900 फीट की ऊँचाई पर।
उत्तराखंड:
  • मुक्तेश्वर: समुद्र तल से 7,500 फीट की ऊँचाई पर

  • मसूरी: समुद्र तल से 7,500 फीट की ऊँचाई पर

  • नैनीताल: समुद्र तल से 6,365 फीट की ऊँचाई पर

  • हिमाचल प्रदेश:

  • शिमला: समुद्र तल से 7,000 फीट की ऊँचाई पर

  • तमिलनाडु:

    • ऊटी (उटकामंड): समुद्र तल से 7,500 फीट की ऊँचाई पर

जनगणना 2011:

  • जनसंख्या:

    • कुल: 121 करोड़
    • पुरुष: 62.37 करोड़
    • महिलाएँ: 58.65 करोड़
  • जनसंख्या वृद्धि:

    • कुल वृद्धि: 18.15 करोड़
    • वृद्धि दर: 17.64%
  • जनसंख्या घनत्व:

    • ग्रामीण: 83.30 करोड़
    • शहरी: 37.71 करोड़
    • समग्र: 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
  • लिंग अनुपात:

    • ग्रामीण: 1,000 पुरुषों पर 947 महिलाएँ
    • शहरी: 1,000 पुरुषों पर 926 महिलाएँ
  • साक्षरता दर:

    • पुरुष: 82.14%
    • महिलाएँ: 65.46%
  • जनसंख्या घनत्व:

  • उत्तर पूर्वी दिल्ली का जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक है, 37,346 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर।

  • दिबांग घाटी का जनसंख्या घनत्व सबसे कम है, केवल 1 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर।

  • लिंग अनुपात:

  • भारत में लिंग अनुपात 1,000 पुरुषों पर 940 महिलाएँ है।

  • पुडुचेरी का माहे जिला सबसे अधिक लिंग अनुपात रखता है, 1,000 पुरुषों पर 1,176 महिलाएँ।

  • दमन जिले का लिंग अनुपात सबसे कम है, 1,000 पुरुषों पर 533 महिलाएँ।

साक्षरता दर:

  • भारत की साक्षरता दर 2001 में 64.83% से बढ़कर 2011 में 74.04% हो गई है।
  • मिजोरम का सेचीप जिला सबसे अधिक साक्षरता दर रखता है, 98.76%।
  • मध्य प्रदेश का अलीराजपुर जिला सबसे कम साक्षरता दर रखता है, 37.22%।

जनसंख्या वृद्धि दर:

  • अरुणाचल प्रदेश का कुरुंग कुमेय जिला सबसे अधिक जनसंख्या वृद्धि दर दर्ज करता है, 111.01%।
  • नागालैंड का लॉन्गलेंग जिला ऋणात्मक जनसंख्या वृद्धि दर दर्ज करता है, -58.39%।

सबसे अधिक और सबसे कम आबादी वाले जिले:

  • महाराष्ट्र का ठाणे जिला सबसे अधिक आबादी वाला जिला है, जिसकी आबादी 1,10,54,131 है।
  • अरुणाचल प्रदेश का दिबांग घाटी सबसे कम आबादी वाला जिला है।

यहाँ सरल भाषा में पुनर्लिखित सामग्री है:

  • लक्षद्वीप सबसे कम आबादी वाला केंद्र शासित प्रदेश है।
  • सिक्किम भारत का सबसे कम आबादी वाला राज्य है (6,07,688)।
  • दमन और दीव में सबसे अधिक 55.50% की वृद्धि दर रही है।
  • मेघालय में सबसे कम -0.47% की वृद्धि दर रही है।
  • दिल्ली एनसीआर में सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व 11,297 लोग प्रति वर्ग किलोमीटर है।
  • अरुणाचल प्रदेश में सबसे कम जनसंख्या घनत्व 17 लोग प्रति वर्ग किलोमीटर है।
  • केरल में सबसे अधिक लिंग अनुपात है, प्रति 1000 पुरुषों पर 1084 महिलाएं हैं।
  • दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे कम लिंग अनुपात (618) है।
  • हरियाणा राज्यों में सबसे कम लिंग अनुपात (877) है।
  • केरल में सबसे अधिक साक्षरता दर 93.91% है।
  • बिहार राज्यों में सबसे कम साक्षरता दर (63.82%) है, लेकिन इसमें 2001-11 के दशक के दौरान साक्षरता दर में सबसे अधिक वृद्धि हुई है।
तालिका 3.11: मूलभूत आंकड़े
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश राजधानी क्षेत्रफल (हजार वर्ग किलोमीटर में) जनसंख्या भारत की कुल जनसंख्या में प्रतिशत रैंक
लक्षद्वीप कवरत्ती 0.03 64,473 0.05% 35
सिक्किम गंगटोक 0.71 6,07,688 0.48% 28
दमन और दीव दमन 0.11 2,43,247 0.19% 34
मेघालय शिलांग 22.43 29,66,889 2.35% 23
दिल्ली एनसीआर दिल्ली 0.15 1,67,53,235 13.35% 1
अरुणाचल प्रदेश ईटानगर 83.74 13,83,727 1.10% 24
केरल तिरुवनंतपुरम 38.86 3,34,06,061 2.66% 13
दमन और दीव दमन 0.11 2,43,247 0.19% 34
हरियाणा चंडीगढ़ 44.21 2,53,51,462 2.01% 17
केरल तिरुवनंतपुरम 38.86 3,34,06,061 2.66% 13
बिहार पटना 94.16 10,40,99,452 8.23% 3
राज्य राजधानी क्षेत्रफल (1000 वर्ग किमी में) जनसंख्या भारत की जनसंख्या का प्रतिशत रैंक
भारत नई दिल्ली 3287.3 1,21,01,93,422 100.00 -
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र नई दिल्ली 1.5 1,67,53,235 1.38 18
1. आंध्र प्रदेश हैदराबाद 275.608 8,46,65,533 7.00 5
2. अरुणाचल प्रदेश ईटानगर 83.743 13,82,611 0.11 27
3. असम दिसपुर 78.4 3,11,69,272 2.58 14
4. बिहार पटना 94.1 10,38,04,637 8.58 3
5. छत्तीसगढ़ रायपुर 136.0 2,55,40,196 2.11 16
6. गोवा पणजी 3.7 14,57,723 0.12 26
7. गुजरात गांधीनगर 196.0 6,03,83,628 4.99 10
8. हरियाणा चंडीगढ़ 44.3 2,53,53,081 2.09 17
9. हिमाचल प्रदेश शिमला 55.7 68,56,509 0.57 21
10. जम्मू और कश्मीर श्रीनगर 222.2 1,25,48,926 1.04 15

यहाँ सामग्री का सरलीकृत संस्करण है:

राज्य राजधानी क्षेत्रफल (वर्ग किमी में) सकल घरेलू उत्पाद ($ में) प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद ($ में) रैंक**
जम्मू और कश्मीर श्रीनगर 222.2 $1,25,48,926 1,041 19
झारखंड रांची 74.7 $3,29,66,238 2,724 13
कर्नाटक बैंगलोर 191.8 $6,11,30,704 5,052 9
केरल तिरुवनंतपुरम 38.9 $3,33,87,677 2,763 12
मध्य प्रदेश भोपाल 308.0 $7,25,97,565 6,003 6
महाराष्ट्र मुंबई 307.7 $11,23,72,972 9,294 2
मणिपुर इंफाल 22.3 $27,21,756 221 24
मेघालय शिलांग 22.4 $29,64,007 242 23
मिजोरम आइजोल 21.1 $10,91,014 90 29
नागालैंड कोहिमा 16.6 $19,80,602 160 25
उड़ीसा भुवनेश्वर 155.7 $4,19,47,358 3,470 11
पंजाब चंडीगढ़ 50.4 $2,77,04,236 2,291 15
राजस्थान जयपुर 342.2 $6,86,21,012 5,674 8
सिक्किम गंगटोक 7.1 $6,07,688 51 31
तमिलनाडु चेन्नई 130.1 $7,21,38,958 5,964 7
त्रिपुरा अगरतला 10.5 $36,71,038 367 28

नोट: प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद की गणना राज्य के सकल घरेलू उत्पाद को उसकी जनसंख्या से विभाजित करके की जाती है।

यहाँ सामग्री को सरल भाषा में पुनर्लिखित है:

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश राजधानी क्षेत्रफल (हजार वर्ग किमी में) जीडीपी ($ में) प्रति व्यक्ति जीडीपी ($ में) रैंक
26. उत्तर प्रदेश लखनऊ 243.3 $19,95,81,477 16.49 1
27. उत्तराखंड देहरादून 53.6 $1,01,16,752 0.84 20
28. पश्चिम बंगाल कोलकाता 88.8 $9,13,47,736 7.55 4
1. अंडमान और निकोबार पोर्ट ब्लेयर 8.2 $3,79,944 0.03 32
2. चंडीगढ़ चंडीगढ़ 0.1 $10,54,686 0.09 30
3. दादरा और नगर हवेली सिलवासा 0.5 $3,42,853 0.03 33
4. दमन और दीव दमन 0.1 $2,42,911 0.02 34
5. लक्षद्वीप कवरत्ती 0.03 64,429 0.01 35
6. पुडुचेरी पुडुचेरी 0.5 $12,44,464 0.10 28

श्रीनगर (ग्रीष्मकालीन राजधानी); जम्मू (शीतकालीन राजधानी).

2011 के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार।

नोट: तेलंगाना को आंध्र प्रदेश से अलग कर 29वां राज्य बनाया गया है। उपरोक्त जानकारी में आंध्र प्रदेश में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दोनों शामिल हैं।