सामान्य अध्ययन प्रश्न 282

प्रश्न: भारतीय इतिहास के संदर्भ में ‘द्वैध शासन (dyarchy)’ सिद्धांत का तात्पर्य है

विकल्प:

A) केंद्रीय विधानमंडल को दो सदनों में विभाजित करना।

B) दोहरी सरकार की शुरुआत, अर्थात् केंद्र और प्रांतीय सरकारें।

C) दो शासकों का होना; एक लंदन में और दूसरा दिल्ली में।

D) प्रांतों को सौंपे गए विषयों को दो श्रेणियों में विभाजित करना।

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उत्तर:

सही उत्तर: D

समाधान:

  • व्याख्या [d] द्वैध शासन, जिसे डायार्की भी कहा जाता है, भारत सरकार अधिनियम (1919) द्वारा ब्रिटिश भारत के प्रांतों के लिए प्रस्तुत दोहरी सरकार की प्रणाली है। द्वैध शासन का सिद्धांत प्रांतीय सरकार की कार्यपालिका शाखा को प्राधिकारिक और लोक-उत्तरदायी खंडों में विभाजित करना था। पहला खंड कार्यपालिका परिषदों से बना था, जिन्हें पहले की तरह ताज द्वारा नियुक्त किया जाता था।